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आजादी के अमृत महोत्वस के तहत मनाई गयी 1857 के प्रथम विद्रोह की वर्षगांठ


 



अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़, आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत मंगल पाण्डे द्वारा सन् 1857 में 10 मई को किये गये प्रथम विद्रोह की वर्षगांठ के अवसर पर जिला विकास अधिकारी भरत कुमार मिश्र की अध्यक्षता में विकास भवन के गॉधी सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार से श्री योगेन्द्र सिंह चौहान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी फाउण्डेशन के संरक्षक श्री सुरेन्द्र शर्मा एवं अध्यक्ष कुंवर प्रमोद सेनानी मंचासीन हुए। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाने वाले मंगल पाण्डेय के चित्र पर डीडीओ भरत कुमार एवं स्वतंत्रता संग्र्राम सेनानियों के परिजनों ने माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को माल्यार्यण कर सम्मानित किया गया, साथ ही रजनी तौमर का शॉल ओढ़ाकर व माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।


          डीडीओ श्री मिश्र ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विस्तार से मंगल पाण्डे के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 10 मई 1587 को मंगल पाण्डे द्वारा मेरठ छावनी से शुरू किया गया स्वतंत्रता संग्राम का आन्दोलन धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल गया। कुवंर प्रमोद सेनानी ने बताया कि अलीगढ़ भी स्वतंत्रता आन्दोलन से अछूता नहीं है। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नारायण पण्डित को 20 मई 1857 को सरेआम मदारगेट पर फॉसी की सजा दी गयी, जिससे अलीगढ़ में भी अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया जिसने स्वतंत्रता आन्दोलन को जनआन्दोलन बना दिया। मुख्य अतिथि योगेन्द्र सिंह ने विस्तार से जनपद एवं देश में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास संध्या रानी बघेल, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी हरिप्रेम, कामेश कुमार गौतम, सुरेन्द्र शर्मा, कर्मवीर सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए विकास भवन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश गौड ने बताया कि बंगाल इंफ्रेंट्री रेजीमेंन्ट के मंगल पाण्डे जोकि स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन के महानायक रहे अपने साथियों के साथ गाय व सुअर की चर्बी से बने कारतूस को चलाने का व्यापक स्तर पर विरोध किया, जो स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में मील का पत्थर साबित हुआ।


          गोष्ठी में राष्ट्रीय कवि वेद प्रकाश मणि ने अपनी कविता ’’हे मंगल पाण्डे अमर वीर, फिर आइये भारत से देशद्रोहियों को फिर मिटाइये’’ से मंगल पाण्डे को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सत्यदेव शर्मा, मनमोहन सिंह, बसंत बंसल, दिनेश चौधरी, पवन सेठ, सरदार स्वतंत्र सिंह, हिमांशु गुप्ता एवं पटल सहायक विक्रम सिंह उपस्थित रहे।


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