आगरा, बरेली एवं अलीगढ़ की संयुक्त मण्डलीय खरीफ गोष्ठी-2022 में दी गयी तकनीकी जानकारी

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़ | कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में अलीगढ़ में मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2022 का आयोजन जीटी रोड स्थित होटल आभा ग्राण्ड में किया गया। गोष्ठी का शुभारम्भ कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सहकारिता बी.एल. मीणा, प्रमुख सचिव उद्यान राजेश कुमार सिंह, सचिव कृषि अनुराग यादव, कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह, मण्डलायुक्त अलीगढ़ गौरव दयाल, मण्डलायुक्त आगरा अमित गुप्ता, अपर आयुक्त बरेली प्रीती जायसवाल एवं जिलाधिकारी अलीगढ़ इंद्र विक्रम सिंह द्वारा संयुक्त रूप से मॉ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया।


                कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिये परम्परागत खेती के साथ ही दलहन, तिलहन एवं उद्यानीकरण को बढ़ावा देने की जरूरत है। पंजाब, हरियाणा के किसानों की आय यहां से अधिक है, हमें वहां के किसानों से उन्नत तकनीक सीखने की जरूरत है। खेतों के समतलीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि लेजर लैण्ड लेबलर से खेतों को समतल कराकर किसान खेती में पानी की खपत को कम करने के साथ ही अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास ट्रैक्टर हैं उनको ही सब्सिडी पर सहायक उपकरण देने में वरीयता दी जाए। कृषि विविधीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि देश में लगभग 80 हजार करोड़ रूपये खाद्य तेल आयात करने पर खर्च होते हैं, तिलहन का उत्पादन बढ़ाकर इस पैसे को बचाया जा सकता है। प्रदेश में इस वर्ष 15 हजार किसानों को सोलर सबमर्सिबल पम्प सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग के अनुरूप पायनियर कम्पनी का बाजरा बीज उपलब्ध कराने एवं बाजरा क्रय केन्द्र खोलने पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित कृषि विभाग की योजनाओं के माध्यम से मिल रहे अनुदान का लाभ प्रत्येक वर्ष अलग-अलग किसानों को मिलना चाहिए।


                प्रमुख सचिव सहकारिता बी.एल. मीणा ने बताया कि जनपद हाथरस में सहकारी बैंक की 50 शाखाएं संचालित हैं। प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। सीमावर्ती जनपदों के जिलाधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि उर्वरक पड़ोसी प्रदेशों में ना जाने पाए। उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे एवं हरियाणा के सोनीपत में संचालित एफ.पी.ओ. का उदाहरण देते हुए प्रदेश के किसानों को भी उनकी तकनीक को आत्मसात्् करने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान परम्परागत धान एवं गेंहू की खेती के साथ-साथ मत्स्य, डेयरी, कुक्कुट एवं शाक-भाजी का उत्पादन कर अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।


                प्रमुख सचिव उद्यान राजेश कुमार सिंह ने कृषि विविधिकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिये उद्योगों से जुड़ना होगा। प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू हुई है। आम, लीची, आंवला, अमरूद, सेब, अंगूर से वाइन बनाने को लेकर आगामी 07 जुलाई को प्रदेश स्तर पर बैठक होगी। नई वाइन फैक्ट्री लगाने पर 05 वर्ष तक आबकारी शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्रदेश सरकार इसके लिये 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। कोल्ड स्टोरेज स्वामियों द्वारा आलू भण्डारण किराया बढ़ाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मुनासिब किराया बढ़ाया जाएगा। सरकार आलू उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये प्रतिबद्ध है। आलू की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 100 करोड़ रूपये के बजट का प्राविधान किया गया है।


                कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह ने कहा कि कृषि रक्षा इकाईयों पर पिछले वर्ष भी कृषि रक्षा रसायन उपलब्ध कराए गये हैं। इस वर्ष भी कृषि रक्षा रसायनों की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी। सभी योजनाओं के लक्ष्यों का आवंटन जनपदवार कर दिया गया है।


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