महान क्रान्तिकारी खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर खास| हॅसते-हॅसते फॉसी पर चढ़े खुदीराम बोस

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ,(सूवि)| हॉसी-हॉसी, चोड़बो फॉसी जैसा बंगला लोकगीत खुदीराम बोस की फॉसी के 114 साल बाद आज भी मुखरित है। यह जानकारी क्वार्सी कृृषि फार्म में महान क्रान्तिकारी खुदीराम बोस के शहादत दिवस को संबोधित करते हुये मुख्य वक्ता आजादी का अमृृृत महोत्सव कार्यक्रम में सुरेंद्र शर्मा ने कही। उन्होने बताया कि खुदीराम बोस सबसे कम उम्र के ऐसे क्रान्तिवीर थे, जिन्होंने मृृत्यु के समय भी चेहरे मुस्कान कायम रखते हुये ब्रिटिश साम्राज्य का नाश हो जैसे नारे लगाये।


       स्वतंत्रता सैनानी उत्तराधिकारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने बताया कि उनके परिवार के सात सदस्यों को कैसे अंग्रजों ने मौत दी। सहायक निदेशक सूचना संदीप कुमार ने महान क्रान्तिकारी खुदीराम बोस के जीवन वृृतॉत पर प्रकाश डालते हुये बताया कि बोस का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गॉव में हुआ था। पढाई के दौरान ही आजादी की लगन लगी और 18 वर्ष की आयु में 11 अगस्त 1908 को ब्रितानिया हुकूमत द्वारा फॉसी दे दी गई। आपने कम उम्र में मॉ-बाप को खो दिया था। बडी बहिन ने आपकी परिवरिश की। इस मौके पर संगठन महामंत्री सुरेश चन्द्र शर्मा, कृृषि उपनिदेशक यशराज सिंह, जिला कृृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल, जिला कृृषि अधिकारी अभिनन्दन सिंह समेत सैकडों लोगों ने शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर माल्यार्पण किया।

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