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‘हेल्थकेयर में एआई’ विषय पर हुयी वेबिनार, एएमयू के तीन छात्रों को मिला प्लेसमेंट

 



अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़|  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा ‘डेटा साइंस में करियर कैसे बनाएं’ विषय पर एक वेब टॉक का आयोजन किया गया। फॉरेनएडमिट्स के सीईओ और सह-संस्थापक, अश्विनी जैन ने अपने टॉक में छात्रों को कोडिंग, एनालिटिक्स, सांख्यिकी, डेटा विज़ुअलाइज़ेशन और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में कौशल विकसित करने के बारे में बताया।

उन्होंने प्रतिभागियों से प्रासंगिक सॉफ्ट और औद्योगिक कौशल विकसित करने, विशेषज्ञों से सीखने, एक शुरुआती स्तर के पाठ्यक्रम या विशेषज्ञता का चयन करने, एक पेशेवर पोर्टफोलियो बनाने, इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक प्रदर्शन हासिल करने और नवीनतम उद्योग रुझानों के साथ खुद को अपडेट रखने का आग्रह किया।

अश्विनी ने बताया कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान रखने वाले छात्र डेटा विज्ञान की मूल बातें सीख सकते हैं और डेटा वैज्ञानिक से क्या अपेक्षा की जाती है। प्रबंधन अध्ययन और अनुसंधान संकाय की डीन, प्रोफेसर सलमा अहमद ने डेटा विज्ञान को विभिन्न रूपों में डेटा से ज्ञान या अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों के बारे में एक अंतःविषयी क्षेत्र के रूप में चित्रित किया। स्वागत भाषण में, प्रोफेसर जमाल ए फारूकी (अध्यक्ष, व्यवसाय प्रशासन विभाग) ने आज के कारोबारी माहौल में डेटा विज्ञान की प्रासंगिकता पर बात की।

प्रोफेसर सबूही नसीम और डॉ लामे बिन साबिर ने डेटा साइंस क्षेत्र के प्रमुख घटकों के बारे में बात की। उन्होंने अरमा बानो और मोहम्मद यासिर के साथ कार्यक्रम का प्रबंधन किया जबकि वेब टॉक का संचालन फातिमा मोहताशिम ने किया।

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‘हर घर तिरंगा’ अभियान के उपलक्ष में एएमयू के एसएन हाल में कला प्रतियोगिता का आयोजन

अलीगढ़, 3 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सरोजिनी नायडू हॉल द्वारा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष में कला की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें हाल में रहने वाली छात्राओं ज़िकरा, अरिशा और अदीना ने भोजन को देशभक्ति का स्वाद दिया और स्वादिष्ट तिरंगा व्यंजन तैयार किए, जिसके लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार दिया गया।

सायरा, सुमैया और आफरीन संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहीं; जबकि प्रतियोगिता में उज़मा और ज़ैनब मोइन और सारा तीसरे स्थान पर रहीं। सांत्वना पुरस्कार युसरा, रीफा, आफरीन, नाजरीन, शुमायला और रिया ने साझा किया। एसएन हॉल की प्रोवोस्ट प्रोफेसर शाहीन ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में बने सलाद व्यंजन, देशभक्ति की भावना वाले छात्रों द्वारा तैयार किए गए तिरंगे पनीर की कटार, केक और मिठाइयों ने भोजन-थीम वाले उत्सव की मेज को विस्तार दिया।

निर्णायकों, डॉ उरूस इलियास और श्रीमती तनवीर बदर ने प्रतिभागियों को अपने व्यंजनों में प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने के लिए सराहना की और प्रस्तुति, पोषक मूल्य और स्वाद पर अंक दिए।

एसएन हॉल वार्डन, डॉ सूफिया नसीम, डॉ असफिया सुल्तान, डॉ बुशरा सिद्दीकी, डॉ सबा खान, डॉ अलीविया रजा और डॉ नबीला खान ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

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एएमयू के तीन छात्रों को मिला प्लेसमेंट

अलीगढ़, 3 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के तीन बी.टेक छात्रों का चयन मैसर्स क्लाइंबर नॉलेज एंड करियर प्राइवेट लिमिटेड (मायकैप्टन), बेंगलुरु द्वारा एक कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से किया गया है, जिसका आयोजन प्रशिक्षण और प्लेसमेंट कार्यालय, जेडएचसीईटी द्वारा  से किया गया।

प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी फरहान सईद ने बताया कि चयनित छात्र सैयद मुरातिब हुसैन (बी.टेक. मेकेनिकल), निधि चावला (बी.टेक. इलेक्ट्रिकल) और नाजनीन निशा (बी.टेक.सिविल) को सालाना साढ़े चार लाख रूपये के पैकेज पर नियुक्ति प्रदान कि गयी है।  

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‘हेल्थकेयर में एआई’ विषय पर वेबिनार

अलीगढ़, 3 अगस्तः स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स, यूके में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फॉर डिसीजन मेकिंग के लेक्चरर, डॉ हैदर रजा, ने इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल-आईआईसी, जेड एच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा ‘एआई इन हेल्थकेयर’ विषय पर आयोजित वेबिनार में मेडिकल सेटिंग्स में मशीन लर्निंग एल्गोरिदम और अन्य संज्ञानात्मक तकनीकों के अनुप्रयोगों के बारे में व्याख्यान दिया।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में विभिन्न एआई अनुप्रयोगों और एआई आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड के उपयोग पर चर्चा की। डॉ हैदर ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस में ईईजी और एमईजी में गैर-स्थिरता और उनकी देखरेख में विभिन्न एआई परियोजनाओं के बारे में भी बात की और व्यापार-संचालित एआई परियोजनाओं पर चर्चा की, जिसे उन्होंने एसेक्स पुलिस के लिए पूरा किया था।

मोहम्मद इमरान ने स्वागत भाषण दिया और मोहम्मद शोएब ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। कार्यक्रम का संचालन अब्दुल्ला खान ने किया।

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डा. शाहनवाज अहमद मलिक मल्लापुरम केन्द्र में समन्वयक नियुक्त

अलीगढ़, 3 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मल्लापुरम केंद्र में कानून विभाग की इकाई से सम्बंधित डॉ शाहनवाज अहमद मलिक को इकाई का समन्वयक नियुक्त किया गया है।

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अलीगढ़, 3 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डा. जेडए डेंटल कालिज के पीरियोडोंटिक एण्ड कम्यूनिटी डेंटिस्ट्री विभाग द्वारा राष्ट्रीय मुख स्वच्छता दिवस के अवसर पर दो कार्यक्रमों की श्रंखला आयोजित की गई है। विभाग की ओपीडी नम्बर 2 में 6 अगस्त तक पिट एण्ड फिशर सीलेंट निशुल्क कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है जिसमें आम जनता विशेष कर बच्चें में दंत निवारक चिकित्सा के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डा जेडए डेंटल कालिज के प्रिन्सिपल प्रोफेसर आरके तिवारी ने कहा कि इस दिवस का आयोजन मुख स्वास्थय और इसके महत्व के सन्देश को फैलाने और दांतों की उपेक्षा की प्रवृति को रोकने के उद्देश्य से किया जाता है। उन्होंने कहा कि दांतों सुरक्षा के बारे में जिस प्रकार से लोगों में लापरवाही बरती जाती है उससे उनके स्वास्थय पर विपरीत प्रभाव भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष ग्रामीण और शहरी इलाकों में विभिन्न प्रकार के कैम्प आयोजित किये जाते हैं जिसके माध्यम से उनमें दंत रोगों और मुख स्वास्थय के प्रति जागरूकता पैदा की जाती है।

विभाग द्वारा अहमदी स्कूल फार विजुअली चैलेज्ड में मुख स्वच्छता शिविर का आयोजन किया गया जिसमें छात्रों के दांतों की जांच की गई। शिविर में डेंटल कालिज के चिकित्सकों और रेजीडेंट ने छात्रों को दांतों की देखभाल के महत्व के बारे में शिक्षित किया। शिवर में 46 छात्रों के दांतों की जांच की गई और 28 छात्रों के की मुख स्वास्थय से सम्बन्धित विभिन्न समस्याओं का निदान किया गया। छात्रों को ब्रश करने की तकनीक के बारे में भी बताया गया।  

पीरियोडोंटिक एण्ड कम्यूनिटी डेंटिस्ट्री विभाग विभाग की प्रोफेसर नेहा अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगों में मुख स्वच्छता में सुधार लाना हालांकि एक कठिन कार्य है लेकिन अगर माता पिता या अभिभावक बच्चों को उपयुक्त स्वास्थय शिक्षा प्रदान करें तो भविष्य में उनको दंत संबंधित रोगों से बचाया जा सकता है।

विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विवेक कुमार शर्मा ने कहा कि मुख रोग जैसे दांतों की सड़न और मसूढ़ों की बीमारी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इस लिये सभी को अपने दांतों के स्वास्थय की ओर भी विशेष ध्यान देना चाहिये।

कार्यक्रम के आयोजन में प्रोफेसर एनडी गुप्ता, प्रोफेसर अफशां बे, डा. नायला राशिद, डा. प्रमोद कुमार यादव, डा. सैयद अमान अली के अलावा डा. मुनज्जा अंसारी और इंटर्नस आयुशी केजरीवाल, चांदनी अग्रवाल और शिवाली अग्रवाल का सक्रिय योगदान रहा। 



बौद्धिक संपदा अधिकार पर कामर्स विभाग में कार्यशाला का आयोजन

अलीगढ़, 3 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग द्वारा ‘बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और पेटेंट और डिजाइन फाइलिंग’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन कार्यशाला में संसाधन व्यक्तियों ने प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न पहलुओं, अनुसंधान, परियोजना कार्यों को पेटेंट करने और नवीन विचारों की मौलिकता की खोज करने के तरीकों पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन के तहत राजीव गांधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रबंधन संस्थान, भारत सरकार के सहयोग से किया गया।

कॉमर्स संकाय के डीन, प्रोफेसर एम नासिर ज़मीर कुरैशी ने आईपीआर जागरूकता बढ़ाने और अर्थव्यवस्था में रचनात्मक बौद्धिक प्रयास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि लोगों के अपने विचारों और नवाचारों की रक्षा के अधिकारों के बारे में अपर्याप्त ज्ञान और आईपीआर प्राप्त करने में शामिल प्रक्रियाओं के बारे में कम जागरूकता आर्थिक विकास में बाधा का कारण हो सकती है। भारत की क्षमता और वैश्विक क्षेत्र में इसके महत्व में इज़ाफ़े के साथ समय आ गया है कि हम नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में अग्रणी बनें।

कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष, प्रोफेसर एस एम इमामुल हक ने पेटेंट दाखिल करने की गति में तेजी लाने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि बौद्धिक संपदा के अनुकूल वातावरण को आकार देने के लिए आईपीआर जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्कूलों, विश्वविद्यालयों और उद्योग समूहों में जागरूकता कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करने की आवश्यकता है।

विधि विभाग के शिक्षक और कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन डॉ मोहम्मद नासिर ने प्रतिभागियों को आईपीआर के संरचनात्मक पहलुओं के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा व्यवस्था-कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट, और संबंधित अधिकार- प्राथमिक साधन हैं जिनके द्वारा कानून मानव अभिव्यक्ति, सूचना और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और विनियमित करने का प्रयास करता है। बौद्धिक उत्पादों के निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों द्वारा दूसरों को उनके कार्यों का अनधिकृत लाभ उठाने से रोक कर, ये बौद्धिक संपदा कानून नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करेंगे। डॉ नासिर ने बौद्धिक संपदा के बारे में सोचने के विभिन्न तरीकों को चित्रित किया और बौद्धिक संपदा के संरक्षण में शामिल संगठनों की भूमिका पर चर्चा की।

कुमार राजू (पेटेंट और डिजाइन के सहायक नियंत्रक, भारतीय पेटेंट कार्यालय, आरजीएनआईपीएम), जिन्होंने एक संसाधन व्यक्ति के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया, ने पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया और महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अहमद मूसा खान, डॉ मोहम्मद सईम खान और डॉ असलम खान ने किया।

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