अमुटा चुनाव के तौर-तरीकों पर चर्चा के लिए धारा 19(2) के अंतर्गत कुलपति द्वारा समिति का गठन

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़ | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (एएमयूटीए/अमुटा) के सदस्यों से सम्बन्धित कई अभ्यावेदनों के मद्देनजर, कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर ने एएमयू अधिनियम, 1920 की धारा 19(2) के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व-अमुटा सचिवों की एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो मुख्य चुनाव अधिकारी और मानद् सचिव के साथ संविधान के अनुसार अमुटा का चुनाव कराने के तौर-तरीकों पर विचार विमर्श कर तीन दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।


यह निर्णय इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की गई है और वार्षिक आम सभा की बैठक का कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।


एएमयू के रजिस्ट्रार श्री मोहम्मद इमरान (आईपीएस) की एक अधिसूचना के अनुसार, पूर्व अमुटा सचिव डॉ मोहम्मद शाहिद, प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुस सलाम, प्रोफेसर मोहम्मद रिजवान खान और प्रोफेसर आफताब आलम समिति के सदस्य नियुक्त किये गए हैं।


कुलपति ने यह भी इच्छा व्यक्त की है कि अमुटा के चुनाव संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा चार सदस्यीय समिति और मानद् सचिव, अमुटा के परामर्श से 10 अक्टूबर, 2022 तक कराए जाएं।


अधिसूचना में कहा गया है कि एएमयू अधिनियम, 1920 की धारा 19(2) के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग कर कुलपति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 15 सितंबर को प्रस्तावित अमुटा चुनाव को स्थगित कर दिया गया है।


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इंडियन ऑयल की डीजीएम सुमिता सिंह का जनसंचार विभाग में व्याख्यान


अलीगढ़, 14 सितंबरः इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की डीजीएम कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा, सुमिता सिंह ने मीडिया के भविष्य, संचार की नई अवधारणाओं और रुझानों पर चर्चा की। वह एएमयू में जनसंचार विभाग के छात्रों के लिए आयोजित विशेष व्याख्यान में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। उन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया।


उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक सभी मीडिया के भविष्य पर हावी होने जा रही है और यह जरूरी है कि इस क्षेत्र में काम करने के इच्छुक उम्मीदवारों को इसके अनुरूप अपना कौशल विकसित करना चाहिए।


कॉर्पाेरेट संचार और इसकी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने संचार विशेषज्ञ के रूप में काम करने की संभावनाओं के बारे में बात की और संकट प्रबंधन और कॉर्पाेरेट सामाजिक जिम्मेदारी के मुद्दों पर बात की।


सुमिता ने बाजार की लगातार बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल वही लोग जो चुस्त और जनता की नब्ज को समझने में सक्षम हैं, वे इस सख्त प्रतियोगिता में सफल हो पाएंगे। उन्होंने छात्रों को डिजिटल और सोशल मीडिया संचार के क्षेत्र का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि यह आने वाले समय में मुख्य आधार बनने जा रहा है।


वह एक इंटरैक्टिव सत्र में भी शामिल हुईं और छात्रों के सवालों के जवाब दिए। स्वागत भाषण में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष, प्रोफेसर पिताबास प्रधान ने कॉर्पाेरेट संचार में सुमिता के उल्लेखनीय करियर पर प्रकाश डाला।डॉ हुमा परवीन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।व्याख्यान के बाद, सुमिता प्रोफेसर विभाग के शिक्षकों आफरीना रिज़वी, डॉ जी के साहू और मोहम्मद अनस के साथ विभाग परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने के लिए शामिल हुईं।


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एएमयू ड्रामा क्लब द्वारा ‘करबल कथा’ का मंचन


अलीगढ़, 14 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ड्रामा क्लब ने 10 और 11 सितंबर को कर्बला की प्रसिद्ध लड़ाई को दर्शाने वाले नाटक ‘करबल कथा’ का कैनाडी हाल में मंचन किया।


शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और मेहमानों ने मानव पीड़ा और मनुष्य की लालची और भौतिकवादी प्रकृति का अवलोकन किया, जबकि ऐतिहासिक रक्तपात को ऑर्केस्ट्रा पिट और फ्लाई लॉफ्ट पर विशेष प्रभाव के साथ याद करते हुए दृश्यों और रोशनी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।


आसिफ नकवी द्वारा लिखित और मुज़म्मिल हयात भवानी द्वारा निर्देशित नाटक में टीवी अभिनेता शाह ज़ेब खान ने रावी की मुख्य भूमिका निभाई जबकि क्लब के अनिक, मुअज्जम, मानव, पीयूष, माज़, फ़राज़, ऋषभ, काज़िम ने नाटक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ज़ैद खान सहायक निर्देशक थे, रिज़वान, अकरम, ज़ैनब और साइमा ने सहायक निर्देशक की भूमिका अदा की।


नाटक के रचनात्मक प्रमुख और सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र के समन्वयक, प्रोफेसर एफ एस शेरानी ने कहा कि हमने डिजिटल प्रोजेक्टर, फॉग मशीन, प्रकाश और ध्वनि प्रभावों के साथ मंच पर युद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की, जो यह दिखाने के लिए वास्तविक लग रही थी कि कैसे इमाम हुसैन ने उम्मयद शासक का सामना किया, जो सत्ता हासिल करने और बनाए रखने के लिए उन पर ज़बरदस्ती कर रहा था।


करबल कथा लेखक, प्रोफेसर आसिफ नकवी ने कहा कि यह एक नई सेटिंग के साथ एक पुरानी कहानी है। नाटक समाज की कुरीतियों को उजागर करता है। यह ‘दास्तानगोई’ परंपरा के माध्यम से प्रवास, शरणार्थियों, भ्रष्टाचार और विस्थापन की समस्याओं को दर्शाता है।


मुख्य अतिथि एएमयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो मोहम्मद गुलरेज़ और जानी-मानी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ हमीदा तारिक ने कलाकारों को 22,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया।


विमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल, प्रो नईमा गुलरेज़ के साथ नाटक देखने के बाद प्रो गुलरेज़ ने कहा कि अगर मैं आज नहीं आता तो बहुत कुछ मुझ से छूट जाता। मैं भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होता रहूंगा।


डॉ हमीदा तारिक ने कहा कि इस नाटक में ऐतिहासिक दृश्य का एक उल्लेखनीय प्रदर्शन है जिसमें दिखाया गया है कि कैसे इमाम हुसैन को एक दुर्जेय सेना द्वारा न तो अपने मिशन से रोका जा सकता था और न ही किसी प्रोत्साहन के अद्घार पर उन्हें किसी अयोग्य शासक के प्रति निष्ठा की शपथ के लिए मजबुर किया जा सकता था। उन्होंने समानता, न्याय और शांति के आदर्शों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए शहीद होने का विकल्प चुना।


प्रोफेसर विभा शर्मा (अध्यक्ष, ड्रामा क्लब) ने इतनी कम उम्र में पूरी निपुणता और कौशल के साथ नाटक करने के लिए छात्र कलाकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छात्र कलाकारों और पूरी प्रबंधन टीम की ऊर्जा के साथ नाटक और संगीत का मेल बिल्कुल अद्भुत रहा है।


यूनिवर्सिटी ड्रामा क्लब की अनीजा अख्तर, नशरा और गरिमा ने बताया कि कैनेडी हॉल ऑडिटोरियम में 20 अभिनेताओं और 10 संगीतकारों के साथ नाटक का मंचन चार महीने की कड़ी मेहनत का परिणाम था।


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...नये डीएसडब्ल्यू नियुक्त

अलीगढ़, 14 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज़ को तत्काल प्रभाव से डीन छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) नियुक्त किया है। प्रोफेसर गुलरेज़ एएमयू के प्रो-वाइस चांसलर भी हैं।


इससे पूर्व, कुलपति ने पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर मुजाहिद बेग के अनुरोध पर उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया।


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एएमयू में सर सैयद दिवस पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जायेगा


अलीगढ़, 14 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सर सैयद दिवस 17 अक्टूबर को पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद, सर सैयद अहमद खान की जयंती पर सर सैयद दिवस समारोह पूरे उत्साह के साथ से आयोजित किया जाएगा। ज्ञात हो कि गत दो वर्षों से कोवीड महामारी के कारण, संस्थापक दिवस समारोह का भव्य आयोजन स्थगित कर इसे ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया था।


सर सैयद दिवस की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए आज कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने प्रशासनिक ब्लाक में विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक की।


बैठक को सम्बोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि इस वर्ष सर सैयद दिवस विश्वविद्यालय की परम्पराओं और प्रथाओं के अनुरूप सभी आयोजनों के साथ मनाया जाएगा। हम इस आयोजन की बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहे हैं क्योंकि गत दो वर्षों से महामारी के कारण आयोजनों को कम कर दिया गया था।


प्रारंभिक चर्चा के बाद बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मुख्य कार्यक्रम एथलेटिक्स ग्राउंड पंडाल में आयोजित किया जाएगा, जबकि वेबकास्टिंग के माध्यम से कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग भी की जाएगी। अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में सर सैयद हाउस में सर सैयद के लेखों, पुस्तकों, चित्रों, उनकी व्यक्तिगत चीज़ों, कैलिग्रफी आदि की प्रदर्शनी शामिल है, जबकि इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए व्यक्तियों और संगठनों को पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।


इस उपलक्ष में सर सैयद हाउस और सेंटेनरी गेट सहित मुख्य इमारतों को सजाया जाएगा और छात्रों के लिए पारंपरिक रात्रिभोज भी उनके संबंधित हॉलों में आयोजित किया जाएगा।


बैठक में प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज़, रजिस्ट्रार श्री मोहम्मद इमरान (आईपीएस) और विश्वविद्यालय के अधिकारीयों और शिक्षकों ने भाग लिया।


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जेएन मेडिकल कॉलेज के छात्रों को मिला शीर्ष पुरस्कार


अलीगढ़, 14 सितंबरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के चार मेडिकल छात्रों की एक टीम ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आईएमए, वाराणसी, आईएमए जेडीएन और आईएमए एमएसएन बनारस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में पोस्टर प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार और केस प्रस्तुति में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करके कॉलेज का नाम रौशन किया है।


जेएन मेडिकल कॉलेज की डॉ आस्था अग्रवाल, डॉ लखन प्रकाश गुप्ता, डॉ कार्तिक वार्ष्णेय और डॉ राशिका शेरवानी ने वाराणसी में आयोजित “एकाक्ष- मेडिकल कॉन्क्लेव” में भाग लिया और पोस्टर प्रस्तुति में पहला पुरस्कार प्राप्त किया, जिसका शीर्षक ‘कोविड-19 रोगी देखभाल का स्वास्थ्य कर्मियों के परिवारों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव’ था।


टीम ने सर्जरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ शहबाज हबीब फरीदी के मार्गदर्शन में ‘एंटरोलिथियासिसः आंतों के तपेदिक में एक असामान्य अभिव्यक्ति’ नामक केस प्रेजेंटेशन में भी भाग लिया और उन्हें द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।


छात्रों ने सुट्यूरिंग-लेप्रोस्कोपिक एंड ओपन पर एक कार्यशाला में भी भाग लिया, जबकि जेएन मेडिकल कॉलेज के एक इंटर्न डॉ लखन प्रकाश गुप्ता ने आभार के प्रतीक के रूप में स्मारिका प्राप्त की।


सम्मेलन में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सदस्य, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया।


मेडिसिन फैकल्टी के डीन और जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, प्रोफेसर राकेश भार्गव ने कॉलेज को गौरवान्वित करने और विश्वविद्यालय का नाम ऊंचा रखने के लिए छात्रों को बधाई दी है।


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इतिहास विभाग में ‘मआसिर-ए-रहीमी’ पर व्याख्यान


अलीगढ़, 14 सितंबरः ईरानी अध्ययन संस्थान, गोटिंगेन, जर्मनी की निदेशक, प्रोफेसर इवा ऑर्थमैन ने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के एडवांस्ड स्टडी सेंटर द्वारा ‘संकलन और दृष्टिकोणः मआसिर-ए-रहीमी का स्रोत, संरचना और उद्देश्य’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में अब्दुल बाकी निहवंदी के जीवन के कई पहलुओं और उनके कार्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।


उन्होंने कहा कि अब्दुर रहीम खान-ए-खाना के संरक्षण में भारत में रहने वाले फारसी अप्रवासी अब्दुल बाकी निहावंदी ने 1616 में ‘मआ सिर-ए-रहीमी’ को पूरा किया। इस ग्रन्थ में बैरम खान और उनके बेटे अब्दुल रहीम खान-ए-खाना, जो अकबर के दरबार में महत्वपूर्ण व्यक्ति और प्रतिष्ठित विद्वान थे, की आत्मकथा पर ध्यान केंद्रित करने के साथ जहांगीर के शुरुआती वर्षों तक मुगल शासकों की अवधि को शामिल किया गया है।


प्रोफेसर ईवा ने कहा कि तीन खंडों में संकलित ग्रन्थ में अब्दुर रहीम खान-ए-खाना की वंशावली का आधार फारस के कारा कोयुनलु जनजाति को बताया गया है। अब्दुर रहीम, जिसे पाठ में मर्द-ए-कामिल के रूप में वर्णित किया गया है, की लेखक द्वारा उनके राजनीतिक कौशल और बौद्धिक प्रतिभा और कलाकारों और बुद्धिजीवियों और हिंदी कविता के संरक्षण के प्रशंसा की गयी है।


अब्दुर रहीम के जीवन और कार्यों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि अकबर के दरबार में उनकी परवरिश एक राजकुमार की तरह की गयी थी।


प्रोफेसर ईवा ने कहा कि इस ग्रंथ की भाषा प्रकृति में प्रशंसनीय है और लगभग 1600 पृष्ठ खतेमे के रूप में शामिल हैं जिसमें लेखक ने खान-ए-खाना के समकालीन विद्वानों, कवियों, सैन्य नेताओं और मनसबदारों का वर्णन किया है। लेखक अपने वर्णन में अपने संरक्षक, अब्दुर रहीम को बादशाह के पद पर आसीन करता है, जो आमतौर पर सम्राट के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।


समापन टिप्पणी में इतिहास विभाग कि अध्यक्ष, प्रोफेसर गुलफिशा खान ने सत्रहवीं शताब्दी के इस ऐतिहासिक ग्रन्थ के महत्व पर बात की और छात्रों से गहन शोध के लिए इस तरह के स्रोतों को पढ़ने का आग्रह किया। प्रो. वसीम राजा ने कार्यक्रम का संचालन किया।


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अमुवि में हिन्दी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित


अलीगढ़ 14 सितंबरः हिंदी दिवस के अवसर पर राजभाषा (हिंदी) कार्यान्वयन समिति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘हिंदी सप्ताह समारोह‘ के उद््घाटन सत्र में बोलते हुए समारोह की मुख्य वक्ता हिंदी की सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ0 नमिता सिंह ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई अपनी भाषा में ही लड़ी जा सकती थी और वह भाषा हिंदी ही थी जिसने गुलामी के विरूद्ध पूरे देश को एक कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदी मनसा, वाचा, कर्मणा की भाषा है।


डॉ0 नमिता सिंह ने कहा कि हिंदी की उन्नति तब और तेज़ी से होगी, जब वह दूसरी भाषा एवं बोलियों के साथ मैत्री भाव स्थापित कर लेगी। सामाजिक विभाजन ने हिंदी को कमज़ोर कर दिया है। हिंदी जनता की भाषा है। इसलिए उन नीतियों की समीक्षा करनी होगी जिसमें हिंदी को रोजगार से जोड़ा जा रहा है।


सत्र की अध्यक्षता करते हुए अमुवि के सह कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज़ ने कहा कि हिंदी को क्लिष्टता से बचाना होगा। उन्होंने कहा कि न केवल भाषा बल्कि देवनागरी लिपि पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि भाषा का किसी जाति, धर्म एवं लिंग से संबंध नहीं होता है।


सत्र में विशेष रूप से आमंत्रित वक्ता हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अब्दुल अलीम ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि गांधी जी के हिंदी हिंदुस्तानी के सपने को साकार करना है तो हिंदी और दूसरी भाषाओं में तालमेल बिठाने की ज़रूरत है। प्रो. अलीम ने भारत सरकार के उस प्रयास की सरहाना की जिसके तहत हिंदी को संयुक्त राष्ट्रसभा की भाषा बनाया गया।


हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. तसनीम सुहेल ने  अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि आज हिंदी का अंतर्राष्ट्रीय मंचांे पर महत्त्व बढ़ रहा है। इसमें रोज़गार की सम्भावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन आज भी हिंदी को और अधिक उन्नत बनाना है तो दूसरी भाषाओं का ज्ञान अर्जित करना आवश्यक है। अनुवाद इसमें सहायक हो सकता है इस पर बल देने की आवश्यकता है।


सत्र का संचालन प्रो. शम्भुनाथ ने किया। प्रो. इफ़्फ़त असगर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर शाहुल हमीद ने सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों के बारे में बताया। मंचासीन अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर और शाल पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के दूसरे विभागों के विद्वतजन एवं अनेक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।


इसके अतिरिक्त अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एबीके हाई स्कूल गर्ल्स में हिंदी दिवस बड़े उत्साह से मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन कोआर्डिनेटर डा फरहत परवीन ने किया। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में “देश में हिंदी भाषा का महत्व व संस्कृति में योगदान” विषय पर छात्राओं ने अपने विचार प्रकट किए।


अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में इंचार्ज यूएन नाजनीन ने कहा हिंदी देश को जोड़ने वाली भाषा है। इस अवसर पर हिंदी शिक्षकों, फरहत नफीस तथा रूबीना नें प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया। कोर्डिनेटर डा. फरहत परवीन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


इसके अलावा एएमयू के राजा महेंद्र प्रताप सिंह सिटी स्कूल में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष सभा आयोजित की गई जिसके प्रभारी डॉ. जुल्फिकार हिंदी वरिष्ठ शिक्षक ने भाषा के विस्तार के लिए सरल शब्दावली पर बल दिया। विद्यालय के छात्रों ने अपनी अपनी प्रस्तुति से हिंदी भाषा के महत्व को दर्शाया। हिदी शिक्षक तनवीर अहमद ने हिंदी की रोचक जानकारी से छात्रों को अवगत कराया। विद्यालय के प्रधानाचार्य तनवीर नबी ने हिंदी भाषा को देश को एक सूत्र में जोड़ने वाली एक कड़ी बताया। अंत में फारिहा अफजाल ने सभी का धन्यवाद प्रकट किया।


एएमयू सिटी गर्ल्स हाई स्कूल (काजीपाड़ा) में हिंदी दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विद्यालय की शिक्षिका दरखशां नय्यर ने हिंदी दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हिंदी का महत्व समझाया उन्होंने हिंदी को भारत का गौरव बताया।


विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ मोहम्मद आलमगीर ने इस अवसर पर बच्चों को हिंदी भाषा के विषय में बताया तथा उन्होंने हिंदी के प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है हमें हिंदी के प्रयोग में कभी भी संकोच नहीं अपितु गर्व करना चाहिए। उन्होंने विद्यालय के बच्चों को भी इस विषय पर जागरूक किया।


डॉक्टर पंकज पाराशर (हिंदी विभाग) इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे उन्होंने भी बच्चों को हिंदी भाषा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने डॉक्टर राही मासूम रज़ा का उदाहरण देकर भी बच्चों को हिंदी भाषा के बारे में बताया।


कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका हुमा सिद्दीकी ने किया ।


एएमयू एबीके हाई स्कूल (बॉयज) में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें स्कूल के प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्राचार्य डा. समीना थीं।


इस अवसर पर हिन्दी निबंध लेखन और हिन्दी स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसका संचालन श्री फिरोज खान हिन्दी वरिष्ठ अध्यापाक ने किया।


डा. समीना ने हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना की।उन्होंने क्षेत्रीयवाद और भाषावाद से ऊपर उठकर क्षेत्रीय भाषाओं को एक साथ लेकर हिन्दी को आगे बढ़ाने का आव्हान किया।इस अवसर पर श्री फिरोज खान, श्री हसीब उर रहमान, श्रीमती फातिमा खातून, श्री रजा अब्बास, जमील तथा मुनीर अहमद उपस्थित रहे।

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