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भ्रष्टाचार के दलदल में दूध की धुली है क्या, भाजपा ?...पढ़िए अशोक चौधरी का आलेख

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     एक तरफ भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने की डिम-डिम घोषणा है तो दूसरी ओर भारतीय संसदीय लोकतंत्र को खोखली करती भ्रष्टाचार की दीमक है। आज भ्रष्टाचार लोकतंत्र की आधारशिला बन गया है, जिसे राजनेता पोषित करते है और नौकरशाही इस भ्रष्टाचार की  कार्ययोजना तैयार करती है। इतना ही नहीं न्यायपालिका मिडिया भी इस वाइरस से अछूता नहीं है।


    भारत के अधिकांश राजनैतिक दल किसी परिवार अथवा व्यक्ति द्वारा संचालित है और जाति-सम्प्रदाय के नाम पर इसलिए राजनीति करते हैं ताकि भ्रष्टाचार का खुला खेल सकें और देखते ही देखते वो परिवार या व्यक्ति सेकड़ों हजारों करोड़ के मालिक बन जाते हैं, कैसे? विडंबना यह कि इन पर  चुनाव आयोग की कोई रोक-टोक नहीं, आराम से चुनाव लड़ों और पैसा कमाओ।


    जो पार्टी सत्ता में आती है वही दूसरे दलों के नेताओं को भ्रष्टाचार में फंसा देती है और दबाब का खेल चलता रहता है।


    जहाँ तक भाजपा का प्रश्न है, आज से दो तीन दशक पहले भाजपा में भ्रष्टाचार की ज्यादा घटनायें सुनने को नहीं मिलती थी। भाजपा के संगठन मंत्री /पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता अपने ईमानदार आचरण,  सादा पहनावा सादा भोजन आदि से भ्रष्टाचार को रोकने हेतु प्रेरणा का काम करते थे, अब तो कुंए में भाँग पड़ी है।


    सुख राम, नारायण राणे नारायणदत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर, रीता बहुगुणा जोशी, शुभेंदु अधिकारी, लोकसभा सांसद भावना गवली, शिवसेना नेता यशवंत जाधव, यामिनी जाधव विधायक प्रताप सरनाईक सहित सैकड़ों नेताओं को भाजपा में स्थान दिया गया।


      भाजपा के केंद्र स्तर के व राज्य स्तर के सेकड़ों नेता जो पहले कुछ भी नहीं थे, आज सैकड़ों करोड़ के आदमी है। राजनैतिक प्रभाव से अवैध करोबार करने वाले हजारों कार्यकर्ता है। जब चुनावों में अपार धन खर्च होता है, तो उसकी भरपाई कहाँ से हो, वह केवल भ्रष्टाचार ही है, जिससे यह भरपाई सम्भव है।


    आज तक भाजपा ने किसी भी छोटे बड़े नेता को पार्टी से भ्रष्ट होने के कारण नहीं निकाला, क्यों? क्या सब दूध के धुले है, संत महंत हैं? नहीं! किन्तु कोई नहीं बोलता क्योंकि भाजपा के नेताओं के चरित्र प्रमाणपत्र संघ के प्रचारकों और भाजपा के पूर्णकालिक संगठन मंत्रीयों के द्वारा जारी होते है. अब तो स्थिति यह है कि बहुत से पूर्णकलिक कार्यकर्त्ता कब करोड़पति बन गये है,  और इनके अनेक प्रोजेक्ट चालू हो गये हैं सेवा केंद्रों के नाम पर, यह 20 - 30 वर्ष या उससे भी अधिक वर्ष पूर्णकलिक रहने के बाद पैसा कैसे कमा लेते हैं? जबकि इनके जीवन यापन की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संगठन स्तर पर की जाती है।

 

      अब एक वाइरस और फैल रहा है। संघ में अधिकांश पूर्णकलिक कार्यकर्ता अंततोगत्वा भाजपा में ही जाना चाहते है या भाजपा नेताओं से मधुर संबंध बना कर रखते हैं। मुझे लगता है भाजपा की संगठनात्मक शुद्धता समझने को यह तथ्य काफ़ी है.


    दूसरे मोदी सरकार के विगत 9 वर्ष के शासन में और महंत योगी आदित्यनाथ जी के विगत 6 वर्ष के शासन में किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं हुई और अब तो भाजपा के #जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के कारनामें जनता में चर्चा का विषय बन रहे हैं।


      भाजपा ने विगत विधानसभा चुनावों में राजस्थान की पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार, मध्यप्रदेश की शिवराजसिंह सरकार और हाल ही में कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार खोई है।


   वर्तमान स्थिति यह है कि भाजपा देश भर के अपराधियों माफियों की अंतिम शरणस्थली बन रही है क्योंकि निकट भविष्य में अन्य किसी अन्य पार्टी की सरकार की सम्भावना नगण्य है। भाजपा शासन आने के समय वैश्विक भ्रष्टाचारी देशों में भारत 180 देशों में 85 वें नम्बर पर है और आज 2023 में भी उसी स्थान पर कायम हैं। 


     मुझे लगता है कि #भ्रष्टाचार वर्तमान संसदीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था की अनिवार्यता है, किन्तु भाजपा के ऊपर सनातन मूल्यों की पुनर्नस्थापना का महती उत्तरदायित्व है जिसे ना वर्तमान लोकतान्त्रिक व्यवस्था में प्राप्त करना दुष्कर है, पार्टी में भ्रष्टाचार के रहते तो असम्भव ही है। तब भाजपा के नियंताओं को कुछ ना कुछ व्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी,अन्यथा परिणाम केवल भाजपा संगठन ही नहीं राष्ट्र भी भुगतेगा।

लेखक~अशोक चौधरी

अध्यक्ष - आहुति अलीगढ़

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