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सरकार की तानाशाही# दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के घरों पर की छापेमारी, उपजा ने की निंदा

लाखन ,संवाददाता
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 उत्तर प्रदेश न्यूज़ पोर्टल एसोसिएशन ने की निंदा 

उपजा ने बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार

अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, नई दिल्ली! कई पत्रकारों, स्टैंड-अप कॉमिक्स, व्यंग्यकारों और टिप्पणीकारों के घरों पर सुबह-सुबह छापेमारी करते हुए, दिल्ली पुलिस ने "आतंकवादी संबंधों से संबंधित" मामलों में पूछताछ शुरू कर दी है।  अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है।पत्रकार अभिसार शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह, अनुभवी पत्रकार उर्मिलेश, न्यूज़क्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और लेखिका गीता हरिहरन, प्रसिद्ध पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार के आवास पर छापेमारी कर 1975 के आपातकाल की याद दिला दी गई है।


भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय सचिव एवं उ०प्र०जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन उपजा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने कहा कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार का प्रयास, भय का वातावरण बनाने का प्रयास हो रहा है। जो चिंतनीय और विचारणीय है सरकार के ऐसे सभी प्रयासों का उ०प्र०जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन उपजा विरोध करते हुए घोर निन्दा करती हैं। उन्होंने कहा कि उक्त कृत्य का सभी पत्रकारों को सभी राज्यों में एक साथ पुरज़ोर विरोध दर्ज कराना चाहिए ताकि पत्रकारों पर इस तरह की प्रताड़ना के पहले कोई भी विचार करें औनिंद्यो चक्रवर्ती, कार्यकर्ता और इतिहासकार सोहेल हाशमी, और व्यंग्यकार और स्टैंड-अप कॉमेडियन संजय राजौरा पर आज सुबह 'छापा' मारा गया।

खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की पूछताछ जारी थी.  सूत्रों का कहना है कि दिल्ली साइंस फोरम से जुड़े वैज्ञानिक और लेखक डी. रघुनंदन को 'पुलिस उठा ले गई' है. इस घटना को उत्तर प्रदेश न्यूज पोर्टल एसोसिएशन की उप सचिव चंचल वर्मा ने सरकार की हिटलरशाही और तानाशाह रवैया करार देते हुए अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया हैं. 

सूत्रों का कहना है कि राजौरा को पुलिस स्पेशल सेल, लोधी रोड ले गई है।  पुलिस ने कहा कि वे उसे पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं लेकिन गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं।

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