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ग्रेटर अलीगढ़ योजना और पट्टे निरस्तीकरण की कार्यवाही के विरोध में किसानों का धरना

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम, अलीगढ़, 23 दिसंबर। चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की मांगों को लेकर धरना दिया।12 बजे से तस्वीर महल स्थित राजा महेन्द्र प्रताप सिंह पार्क में जिले में सक्रिय किसान संगठनों के नेता एवं कार्यकर्ता जुटने लगे। लोधा क्षेत्र में ग्रेटर अलीगढ़ योजना के लिए जमीन न देने के किसानों के निर्णय के बाबजूद एडीए द्वारा जबरन जमीन लेने की कोशिश और जिले भर में ग्राम सभा के पट्टों को अवैध घोषित करके खेती और मकानों से बेदखली करने के विरोध में आयोजित इस धरने में सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।

   धरने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के राज्य प्रभारी शशिकांत ने कहा कि अगला साल आंदोलन का साल होगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे के बड़े फैसले दोबारा दिल्ली चलो का फैसला लिया है। सरकार किसी न किसी बहाने किसानों-गरीबों की खेती की जमीनें छीनकर पूंजीपतियों को सौंपने में जुटी है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया 2024 का साल आंदोलन का साल होगा। 26 जनवरी को देश के सभी जिलों में किसान ट्रेक्टर मार्च कर अपनी एकजुटता जाहिर करेंगें|

  किसान सभा के इदरीश मोहम्मद का कहना था कि जिले में आज कोई गांव ऐसा नहीं है , जिसमें गरीबों विशेषकर भूमिहीनों से जमीन छीनने की साज़िश न रची जा रही हो। बेरोजगार मजदूर किसान यूनियन के अध्यक्ष अशोक प्रकाश ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार एक ओर खेती को घाटे का सौदा बना रही है, वहीं दूसरी ओर हमारे बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार देने में असफल साबित हो रही है। कारपोरेट शक्तियों के इशारे पर खेती-बाड़ी और उद्योग धंधों पर पूंजीपतियों का कब्जा करने पर तुली है। मजदूर नेता रमेशचंद्र विद्रोही ने कहा कि किसानों-मजदूरों की एकजुटता मौजूदा सरकार की तानाशाही का ऐसा जबाब देंगें जो इतिहास में अंकित होगा।

 इसी क्रम में जय किसान आंदोलन के प्रदेश उपाध्यक्ष आत्मप्रकाश सिंह ने कहा कि किसान अब एसकेएम की छतरी के नीचे मोर्चाबद्ध हो गए हैं। यह मोर्चा अब मजदूरों के साथ जुड़कर 2024 में ओर भी ज्यादा शक्ति के साथ लुटेरी शक्तियों से सामना करेगी। ग्रेटर अलीगढ़ योजना प्रभावित किसान मोर्चा के सदस्य कृष्णकांत ने एडीए को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जब 600 से अधिक किसानों ने आपत्ति दर्ज करा दी तो फिर एडीए शासन को इस योजना को रद्द करने का प्रस्ताव शासन को भेजने देरी क्यों कर रहा है। एडीए विकास का नहीं, बल्कि खेती के विनाश का प्राधिकरण बन गया है।
   इनके अलावा क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष नगेन्द्र चौधरी, मंडल प्रभारी सुरेश चन्द्र गांधी, महिला जिला प्रभारी शकुन्तला देवी, धर्मपाल चौधरी, अशोक नगोला, सत्यवीर चौधरी,  भाकियू के मुनेश पाल सिंह, किसान सभा के जिलाध्यक्ष सूरजपाल उपाध्याय, कर्मवीर सिंह, इरफान अंसारी,  जय किसान आंदोलन के पोकपाल सिंह, चन्द्र पाल सिंह, बीएमकेयू के अशोक दिवाकर, नेत्रपाल सिंह, मुकेश शर्मा आदि प्रमुख किसान नेताओं ने धरने में शामिल किसान-मजदूरों को संबोधित किया। धरने के उपरांत संयुक्त किसान मोर्चा की ओर जिलाधिकारी के नाम संबोधित 5 सूत्रीय मांगपत्र एसीएम द्वितीय कुंवर बहादुर सिंह को सौंपा।

 ई-रिक्शा चालकों के रजिस्ट्रेशन के पर नगर निगम द्वारा अवैध वसूली के खिलाफ आंदोलन को समर्थन

   महेन्द्र प्रताप सिंह पार्क में किसानों के धरने के दौरान ई-रिक्शा चालक यूनियन के बैनर तले दो दर्जन से अधिक ई-रिक्शा चालक मय ई-रिक्शा से पहुंचे। ई-रिक्शा चालकों ने किसान संगठनों से नगर निगम द्वारा रजिस्ट्रेशन के नाम पर की जा रही अवैध वसूली के विरोध में चल रहे आंदोलन के लिए समर्थन मांगा। इन रिक्शा चालकों में से कई गांवों के किसान परिवारों से भी थे। धरने के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने ई-रिक्शा चालकों के विरोध को जायज ठहराते हुए समर्थन का ऐलान किया। जल्द ही इस जनविरोधी फैसले के विरोध बड़े आंदोलन का ऐलान होगा।

 साल 2024 की शुरूआत आंदोलन से करेंगें किसान

  धरने के दौरान आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। सामूहिक निर्णय लिया गया कि सरकार अगर किसानों-मजदूरों की आवाज नहीं सुनेगी और जनविरोधी सारे फैसले वापस नहीं लेती है, तो किसान-मजदूर 2024 का पूरा साल सड़कों पर आंदोलन करते हुए, 2024 को आंदोलन का साल घोषित करेंगें। किसान  एक जनवरी को एडीए का  घेराव कर के नये साल की शुरुआत करेंगें।
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