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प्रसिद्व फिल्म निर्माता निर्देशक मुजफ्फर अली 25 जनवरी को एएमयू में, गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम शुरू

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अलीगढ मीडिया न्यूज़ ब्यूरो,अलीगढ|  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 75वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। सप्ताह भर चलने वाले समारोह की शुरुआत 21 जनवरी को विश्वविद्यालय खेल समिति द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस हाफ मैराथन के साथ हुई। दौड़ का आयोजन छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग किया गया। विजेताओं को कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज पुरस्कार प्रदान करेंगे। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उर्दू विभाग द्वारा 25 जनवरी को पालीटेक्निक आडीटोरियम में सायं 6.30 बजे मुशायरे का आयोजन किया जाएगा। जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज करेंगे। इस मुशायरे में बाहरी शायरों में शहपर रसूल, प्रो. अहमद महफूज, सलमा शाहीन और नौमान शोक के अलावा स्थानीय शायर शाहबुद्दीन शाकिब, मेहताब हैदर नक्वी, सिराजुद्दीन अजमली, अब्दुल मुईद रशीदी, सरवर साजिद, सरफराज खालिद तथा अहसास अपना कलाम पेश करेंगे।


26 जनवरी को ध्वजारोहण से पहले माध्यमिक विद्यालय के छात्रों द्वारा एसटीएस स्कूल से विश्वविद्यालय परिसर में प्रभात फेरी निकाली जाएगी। ध्वजारोहण समारोह और एनसीसी कैडेटों द्वारा पारंपरिक परेड का आयोजन स्ट्रेची हॉल में प्रातः 9.30 बजे किया जाएगा। रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान संकल्प शपथ दिलाएंगे। प्रशासनिक ब्लॉक भवन, वीसी लॉज, मौलाना आजाद लाइब्रेरी, कला संकाय, एएमयू स्कूलों और कॉलेजों, डीन और डीएसडब्ल्यू सहित सभी प्रोवोस्ट कार्यालयों और प्रॉक्टर कार्यालय पर भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। विवि भवनों पर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।


कुलपति इनडोर रोगियों से मिलने और फल वितरित करने के लिए यूनिवर्सिटी हैल्थ सर्विस का दौरा करेंगे और वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत एसएस हाल परिसर में पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न एएमयू स्कूलों और विभागों में साहित्यिक प्रतियोगिताएं जैसे अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषाओं में इंटर-स्कूल वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिता, पेंटिंग और बैत बाजी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएँगी।


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गणतंत्र दिवस समारोह 2024 के उपलक्ष्य में प्रतियोगिता का आयोजन

अलीगढ़, 24 जनवरीः गणतंत्र दिवस समारोह के तहत एस. टी. एस. स्कूल (मिंटो सर्किल) में एक अंतर्विद्यालयी हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका विषय ’’कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीकः मानव विकास में बाधक है’’ था। इस प्रतियोगिता में ए.एम.यू. गल्र्स हाई स्कूल, ए.एम.यू. सिटी गल्र्स हाई स्कूल, ए.एम.यू. ए.बी.के. हाई स्कूल (गल्र्स), ए.एम.यू. ए.बी.के. हाई स्कूल (बाॅयज) के साथ-साथ मिंटो सर्किल के छात्रों ने बड़े ही उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने वक्तव्य कौशल का प्रदर्शन किया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री फ़ैसल नफ़ीस ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के वरिष्ठ प्रो0. मानवेन्द्र कुमार पंुडीर उपस्थित रहे। उन्होनें अपने वक्तव्य में बताया कि तकनीक मानव के लिए वरदान और अभिशाप दोनों है और इसका सदुपयोग मनुष्य पर निर्भर है। उन्होनें छात्रों से विशेष रुप से अपील की वह मोबाइल का कम-से-कम प्रयोग करें और गूगल, चैट जीपीटी जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक का अनावश्यक उपयोग कर अपनी रचनात्मक और सृजनशीलता को न खोये। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वर्तमान मंे कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक का प्रयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे किया जा रहा है। रोजमर्रा की जिंदगी हो या व्यवसाय, शिक्षा, चिकित्सा कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है। पर यह भी सत्य है कि इसके अत्यधिक प्रयोग ने मानव की ईश्वर प्रदत्त प्रतिभाओं को नष्ट-सा कर दिया है। उन्होंने छात्रों से विशेष आग्रह किया कि वे इस तकनीक का प्रयोग खुद को अधिक क्रियाशील और बोद्धिक रुप से सुदृढ़ बनाने में करें और निष्क्रिय न बनें। प्रतियोगिता के निर्णायक मंड़ल में हिंदी विभाग से डाॅ0 सना फ़ातिमा (सहायक प्राध्यापिका) और डाॅ0 गु़लाम फ़रीद साबरी (सहायक प्राध्यापक) रहे। इस अवसर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने प्रशस्ति चिन्ह देकर मुख्य अतिथि और निर्णायक मंडल को सम्मानित किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रवीण कुमार ( एस.टी. एस स्कूल) ने प्रथम, नैतिक उपाघ्याय ( एस.टी. एस स्कूल) ने दूसरा और हुमैरा (ए.एम.यू सिटी गल्र्स हाई स्कूल) ने तीसरा पुरस्कार प्राप्त किया। उदय शर्मा (ए.एम.यू ए.बी.के हाई स्कूल, बाॅयज) को सांत्वना पुरस्कार मिला।


विजयी छात्रों को स्कूल के प्राचार्य ने बधाई दी और उनके भाविष्य के लिए उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य श्री मो0 तारिक, डाॅ0 नसीम अहमद, सांस्कृतिक समंवयक सुश्री नसरीन फ़ातिमा, सह- सांस्कृतिक समंवयक श्रीमती गज़ाला तनवीर, डाॅ0 इमरान अहमद के साथ-साथ विद्यालय के अन्य शिक्षक और भारी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ ज्योति कुसुमबाल ने किया।


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गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में नजम ख्वानी प्रतियोगिता का आयोजन

अलीगढ़, 24 जनवरीः ए.एम.यू सिटी गर्ल्स हाई स्कूल ( काजीपाड़ा) अलीगढ़ में नजम ख्वानी का आयोजन डा० मो० आलमगीर की अध्यक्षता में किया गया। प्रतियोगिता में निर्णायक श्री फरीद ए. सिद्दीकी (रिटायर्ड पी.जी.टी. उर्दू एसटीएस)उपस्थित रहे । प्रधानाचार्य डॉ० मो० आलमगीर ने उनका स्वागत गुलदस्ता और स्मृति चिन्ह देकर किया। इस प्रतियोगिता में ए.एम.यू के विभिन्न विद्यालयों ने प्रतिभाग किया और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। निर्णायक श्री फरीद ए. सिद्दीकी ने छात्रों को प्रोत्साहित किया।


प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर अदीबा (ए. बी. के. गर्ल्स स्कूल) द्वितीय स्थान पर सिदरा (ए.एम.यू. गर्ल्स हाई स्कूल) तथा मो० शाकिब (ए.बी.के. बॉयज) तृतीय स्थान पर कृष्ण शर्मा (एबी के बॉयज) को प्रदान किया गया। श्री फरीद ए. सिद्दीकी ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये।


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डा. तसद्दुक़ हुसैन के नहीं रहे, एएमयू में शोक

अलीगढ़, 24 जनवरीः शानदार शख्सियत के मालिक, बेहद ज़िंदादिल और बेबाकी से अपनी बात रखने वाले इंसान डा. तसद्दुक़ हुसैन का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें आज यूनिवर्सिटी कब्रिस्तान के शिक्षकों व उनके शुभचिंतकों की उपस्थिति में सुपुर्दे खाक किया गया।


डा. तसद्दुक हुसैन 1980 से 2005 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभग में बतौर लेक्चरर और रीडर कार्यरत रहे। वे इस्लामिक दर्शन के विशेषज्ञ थे। उन्होंने प्रो. नूर नबी के निर्देशन में ’शाह वलीउल्लह के दर्शन’ पर पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। अनेक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों में उन्होंने शोध पत्र प्रस्तुत किये। वे अलीगढ़ जर्नल आफ़ इस्लामिक स्टडीज़’ के संपादक-मंडल के सदस्य रहे। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के निर्वाचित सदस्य भी रहे। दर्शनशास्त्र के के अतिरिक्त उन्होंने अंग्रेजी में भी एम.ए. किया था। उर्दू और अंग्रेजी साहित्य के अतिरिक्त शास्त्रीय संगीत में भी उनकी गहरी पैठ थी। अलीगढ़ के साहित्यिक और संगीतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय और उल्लेखनीय भूमिका रहती थी।


डा. तसद्दुक़ हुसैन बहुत बचपन में ही पूर्ण अंधता के शिकार हो गये थे, किंतु आजीवन उन्होंने अपनी इस विकलांगता को अपने ऊपर कभ्ज्ञी हावी न होने दिया। वे प्रत्येक काम के लिए अकेले ही चला करते थे। उन्होंने कभी इस संदर्भ में अपने लिए किसी भी क़िस्म की रियायत न चाही, न स्वीकार की। उन्होंने दिव्यांगता पर विजय प्राप्त कर ली थी। वे नेशनल फे़डरेशन फाॅर ब्लाइंड से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। इस संदर्भ में उन्होंने अनेक अधिकार दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की।


डा. तसद्दुक़ हुसैन के निधन पर अलीगढ़ बिरादरी शोक में है और अनेकविध रूप से उनकी ज़िंदादिली, सक्रियता, बाधाओं को जीत लेने की क्षमता, लोगों से दिली लगव, धर्मनिरपेक्षता का स्मरण कर रही है। आज उनको सुपुर्दे खा़क करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के दौरान यह देखने को मिला। अमुवि के कुलपति प्रो. मुहम्मद गुलरेज ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।


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अमुवि के वाणिज्य विभाग में मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एमएचआरएम) कार्यक्रम

अलीगढ़, 24 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग ने मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एमएचआरएम) कार्यक्रम के छात्रों द्वारा आयोजित मानव संसाधन (एचआर) मीट का आयोजन कैनेडी आॅडिटोरियम में किया जिसका उद्देश्य प्रतिभा प्रबंधन के उभरते परिदृश्य का पता लगाने के लिए उद्योग जगत के लोगों और शिक्षाविदों को एक साथ लाना था।


मुख्य अतिथि आईटीसी लिमिटेड (हरिद्वार) में एचआर प्रमुख और एनएचआरडीएन और पीएनजीआई (उत्तराखंड चैप्टर) के अध्यक्ष अल्ताफ हुसैन ने प्रतिभा प्रबंधन में स्वचालन और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के बीच संतुलन पर जोर दिया। एएमयू के रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान (आईपीएस) सहित अन्य अतिथियों ने भविष्य के मानव संसाधन पेशेवरों को आकार देने में शैक्षणिक-उद्योग सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला, और गतिशील कॉर्पोरेट मांगों के लिए छात्रों को तैयार करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया।


कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर नवाब अली खान ने विचार विनिमय के लिए एक मंच तैयार करने और वर्तमान कारोबारी माहौल में विषय की प्रासंगिकता पर जोर दिया।


वाणिज्य संकाय के डीन प्रोफेसर नासिर जमीर कुरैशी ने सकारात्मक और समावेशी कार्य वातावरण को बढ़ावा देने में मानव संसाधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में श्री ए रहमान, प्रबंध निदेशक, एसबीसीसीय श्री ओवैस रहमान, मानव संसाधन प्रबंधक, विप्रोय और श्री सैयद मोहम्मद जकीउल्लाह, एसोसिएट डायरेक्टर (एचआर और एडमिन), आईएमसीएस ग्रुप। प्रत्येक वक्ता ने चर्चा की गहराई और विविधता में योगदान करते हुए महत्वपूर्ण अनुभवों को साझा किए।


एचआर मीट एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ संपन्न हुई, जिससे प्रतिभागियों को वक्ताओं के साथ जुड़ने और प्रतिभा प्रबंधन गतिशीलता में गहराई से उतरने का मौका मिला। शिक्षा और उद्योग के बीच एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करते हुए, इलुमिना एचआर की बैठक और इंटरेक्शन ने प्रतिभा प्रबंधन के भविष्य को आकार देते हुए सार्थक चर्चा की सुविधा प्रदान की। श्री हैदर अली जुनैदी, सुश्री फरवा सकीना, श्री उजैर अंसारी और श्री इल्हाम शम्स उस्मानी सहित छात्र आयोजकों ने कार्यक्रम को शानदार बनाने में योगदान देने के लिए मेहमानों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


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प्रसिद्व फिल्म निर्माता निर्देशक मुजफ्फर अली 25 जनवरी को एएमयू में

अलीगढ़, 24 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी डिबेटिंग एंड लिटरेरी क्लब द्वारा 25-26 जनवरी, 2024 को दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जिसमें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, लेखक और कवि पदम श्री मुजफ्फर अली के साथ दो पैनल चर्चाएं शामिल होंगे। जिसमें उनके संस्मरण ‘जिक्र’ जो सिनेमा, कविता, कला, राजनीति और सांस्कृतिक संगम पर चर्चा होगी तथा वीमेन्स कॉलेज और कैनेडी ऑडिटोरियम में यूनिवर्सिटी ड्रामा क्लब द्वारा एक नाटक जबान दाराज का मंचन भी किया जाएगा। 25 जनवरी को मुजफ्फर अली शाम 4 बजे से वीमेन्स कॉलेज सभागार में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद असीम सिद्दीकी और जामिया मिलिया इस्लामिया के विजिटिंग फैकल्टी के कला और संस्कृति क्यूरेटर सुश्री अंबरीन खान के साथ बातचीत करेंगे। .


एएमयू कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे जबकि वीमेन्स कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर नईमा खातून मानद् अतिथि होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनसंचार विभाग के प्रो शाफे किदवई करेंगे।डिबेटिंग एवं लिटरेरी क्लब की अध्यक्ष डॉ. सदफ फरीद के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर लेखक की हस्ताक्षरित पुस्तकें भी उपलब्ध रहेंगी। दूसरे दिन कैनेडी ऑडिटोरियम में शाम 4ः30 बजे पैनल डिस्कशन और नाटक के का मंचन होगा।


उल्लेखनीय है कि जिक्रः इन द लाइट एंड शेड ऑफ टाइम में मुजफ्फर अली के बचपन और लखनऊ और अलीगढ़ में प्रारंभिक वर्षों, उनके निर्देशन के अनुभवों, सिनेमा, कविता, सूफीवाद, कला और संस्कृति में उनके प्रयासों और अन्य दिलचस्प प्रसंगों का प्रेरक वर्णन शामिल है।


 

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