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जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर सात दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन

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अलीगढ मीडिया डॉट कॉम अलीगढ़।अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में वन्यजीव विज्ञान विभाग तथा मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी-एएमयू) के सहयोग द्वारा आयोजित जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर सात दिवसीय ऑनलाइन पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य लोगों और विश्व स्तर पर इसकी प्रासंगिकता और जैव विविधता के संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना था। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्रोफेसर मुनव्वर आलम खालिद के उद्घाटन भाषण में जैव विविधता संरक्षण, चुनौतियों और संभावित समाधानों का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया। इसके बाद के सत्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. मोहम्मद शाह हुसैन ने और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मिलिंद एम. सरदेसाई, जिन्होंने गुफाओं के माध्यम से पुरातत्व-वनस्पति विज्ञान की खोज की ने पर्यावरण पुर्नस्थापना पर अपने विचार रखे।


इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की डॉ. अंबरीना सरदार खान ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जबकि एएमयू के प्रो. उरूस इलियास ने जैव विविधता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ऋचा कोठारी ने सतत विकास लक्ष्यों को सामाजिक ढांचे में एकीकृत करने की वकालत की।


जम्मू विश्वविद्यालय के प्रो. सुशील वर्मा ने लुप्तप्राय पौधों के संरक्षण के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर चर्चा की, जबकि एसकेयूएएसटी-कश्मीर के डॉ. खुर्शीद अहमद ने पारिस्थितिक तंत्र और प्रजातियों के बीच जटिल संबंधों को रेखांकित किया।


अंतिम दिन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रो. ए.एल. रामनाथन ने ग्लेशियरों और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों पर प्रकाश डाला। दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. आयशा सुल्ताना ने प्रतिभागियों से परागण संरक्षण में योगदान देने का आग्रह किया। पाठ्यक्रम समन्वयक और यूजीसी-एचआरडीसी की निदेशक डॉ. फायजा अब्बासी के साथ-साथ वन्यजीव विज्ञान विभाग के डॉ. कलीम अहमद और डॉ. अहमद मसूद खान ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


वन्यजीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सतीश कुमार ने महत्वपूर्ण विषय पर पाठ्यक्रम आयोजित करने के प्रयासों के लिए समन्वयकों की सराहना की।


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राष्ट्रीय पेरियोडॉन्टिस्ट दिवस मनाया गया


अलीगढ़, 29 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कॉलेज के पेरियोडोंशिया और सामुदायिक दंत चिकित्सा विभाग ने राष्ट्रीय पेरियोडॉन्टिस्ट दिवस के अवसर पर कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया, जिसमें एक जागरूकता कार्यक्रम और एक पेरियो क्विज आदि शामिल थे।


विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विवेक कुमार शर्मा ने मुख स्वास्थय की देखभाल और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज को मुख स्वच्छता के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरियोडोंटोलॉजी का आभार व्यक्त किया।


पेरियो क्विज प्रतियोगिता में, चार सदस्यों वाली नौ टीमों ने डॉ. अफाफ जिया की देखरेख में भाग लिया। डॉ. सिदरा, डॉ. रमशा, डॉ. सबात और डॉ. समन अफाक की टीम ने क्विज प्रतियोगिता में जीत हासिल की। इंडियन सोसाइटी ऑफ पेरियोडोंटोलॉजी से लकड़ी के टूथब्रश और प्रमाण पत्र प्राप्त वितरित किये गये।


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एएमयू के भौतिक विभाग में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया


अलीगढ़, 29 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जो भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी. वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज करने के लिए मनाया जाता है, जिसके लिए उन्होंने नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।


मुख्य अतिथि,एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.के. सिंह ने सर सी.वी. रमन के वैज्ञानिक कौशल के बारे में बात की और वर्तमान संदर्भ में उनकी खोज की प्रासंगिकता पर चर्चा की।


उन्होंने कहा कि छात्रों को उनके शिक्षकों द्वारा किए गए वैज्ञानिक शोधों से अवगत कराया जाना चाहिए क्योंकि इससे भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने में मदद मिलेगी और देश को वैज्ञानिक नवाचारों में आगे ले जाया जाएगा।


सम्मानित अतिथि, प्रोफेसर एस. उमाशंकर (भौतिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बई) ने एएमयू के अपने सहयोगियों को याद किया, जिनके साथ उन्होंने विभिन्न विषयों पर कार्य किया था और शोध व्याख्यानों को साझा किया। उन्होंने छात्रों और युवा शिक्षकों से आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक योग्यता अपनाने और अपनी पढ़ाई में सामने आने वाली हर चीज पर सवाल उठाने का आग्रह किया।


उन्होंने संध्याकालीन के सत्र में ‘न्यूट्रिनोः हम क्या जानते हैं और क्या नहीं’ विषय पर एक व्याख्यान भी दिया।


विशेष अतिथि, प्रोफेसर कजरी मजूमदार (उच्च ऊर्जा भौतिकी विभाग, प्राकृतिक विज्ञान स्कूल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई) ने बताया कि एएमयू के अनेक शिक्षकों का टीआईएफआर के साथ सहयोग है और नए विचारों के लिए हमेशा जगह होती है। उन्होंने छात्रों से विज्ञान को एक मनोरंजक प्रवृत्ति के रूप में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।


उन्होंने ‘हिग्स बोसोनः क्यों और कैसे?’ विषय पर व्याख्यान दिया।


विज्ञान संकाय के डीन प्रो. कमरुल हसन अंसारी ने विज्ञान दिवस मनाने के महत्व पर जोर दिया और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के तरीके सुझाए जो अंततः विश्वविद्यालय की रैंकिंग में सुधार करने में मदद करेंगे।


इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. सज्जाद अतहर ने विभाग द्वारा निकट भविष्य में आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी और इसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।


मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस.के. सिंह द्वारा भौतिकी बुलेटिन-2024 एवं वार्षिक रिपोर्ट-2023 का विमोचन किया गया।


प्रोफेसर उमाशंकर और प्रोफेसर मजूमदार ने विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता के तहत प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।


डॉ जय प्रकाश (संयोजक, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह समिति) ने कार्यक्रम का संचालन किया और धन्यवाद ज्ञापन दिया।


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जेएन मेडिकल कालिज के सर्जनों द्वारा दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया


अलीगढ़ 29 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जे.एन. मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सर्जनों की एक टीम ने एक मरीज की अंगूठे की साथ की उंगली जिसे इशारा करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है (तर्जनी) दुर्लभ सर्जरी कर सफलतापूर्वक दोबारा प्रत्यारोपित किया गया है। मरीज की एक ग्राइंडर दुर्घटना के बाद गंभीर दर्द एवं कष्ट का सामना कर रहा था। इस सर्जरी में शामिल चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम के प्रयास ने पुनर्निर्माण सर्जरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता का एक उदाहरण पेश किया।


49 वर्षीय मरीज, रामेश्वर दयाल, हाई-स्पीड ग्राइंडर द्वारा कटी हुई तर्जनी के साथ आपातकालीन विभाग में आए, जिससे अन्य उंगली को भी नुकसान हुआ था और उनकी बीच की उंगली में भी संवहनी चोट लगी। स्थिति गंभीर थी, और रक्त आपूर्ति बहाल करने और अपरिवर्तनीय ऊतक क्षति को रोकने के लिए आपातकालीन मदद की आवश्यकता थी।


डॉ. एम फहुद खुर्रम और डॉ. शेख सरफराज के नेतृत्व में प्लास्टिक सर्जनों की एक टीम ने पहले कटी हुई उंगली को स्ट्राइल सेलिन सोक्ड गौज़ में सावधानीपूर्वक संरक्षित किया, ताकि उंगली पुनः प्रत्यारोपण के लिए व्यवहार्य बनी रहे।


सर्जिकल प्रक्रिया को डॉ. सरफराज, डॉ. नोहा, डॉ. रूपराज, डॉ. शिशिर और डॉ. फहदुद्दीन के साथ-साथ एनेस्थेटिस्ट डॉ. उम्मे मारिया और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।


डॉ. सरफराज, जो मुख्य ऑपरेटिंग सर्जन थे, ने बताया कि इस प्रक्रिया में डीब्रिडमेंट और टैगिंग, बोन फिक्सेशन के-वायर फिक्सेशन का उपयोग करके, हड्डी के टुकड़ों को स्थिर किया और वॉलर संरचनाओं की सर्जरी को अंजाम दिया।


उन्होंने कहा कि रीप्लांटेशन सर्जरी समय के अनुसार एक महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है क्योंकि कटे हुए हिस्से की व्यवहार्यता की सीमित होती है। चिकित्सकों की टीम ने रक्त प्रवाह को बहाल करने, वाहिकाओं और तंत्रिकाओं में सफलतापूर्वक टांके लगाने का कार्य किया।


सफल प्रतिरोपण के बाद, रोगी की तर्जनी समामान्य हो गई है और हाथ चिकित्सा विशेषज्ञ उसे ताकत, लचीलापन और निपुणता वापस पाने के लिए व्यायाम के माध्यम से रोगी का मार्गदर्शन करेंगे।


विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम फहुद खुर्रम ने हाथ की सुरक्षा के संबंध में जन जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।


वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन, प्रोफेसर इमरान अहमद ने सर्जनों की टीम के समर्पण और विशेषज्ञता के प्रयासों की सराहना की, उन्होंने कहा कि उन्होंने न केवल एक उंगली बचाई है, बल्कि समान चुनौतियों का सामना करने वाले अनगिनत रोगियों के लिए आशा को भी जगाया है।


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कार्यस्थल पर भेदभाव एवं उत्पीड़न पर कार्यशाला आयोजित


अलीगढ़ 29 फरवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के वाणिज्य क्लब के सहयोग से मास्टर ऑफ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एमएचआरएम) के दूसरे सेमेस्टर के छात्रों द्वारा ‘कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न को संबोधित करना’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।


एमएचआरएम कार्यक्रम के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट अधिकारी और कार्यशाला के संयोजक, प्रोफेसर नवाब अली खान ने कार्यस्थलों पर सम्मान और समानता की संस्कृति विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं को प्रभावी ढंग से संबोधित करने और कम करने के लिए व्यक्तियों और संगठनों को सशक्त बनाने में कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला।


कॉमर्स क्लब की प्रभारी डॉ. नगमा अजहर ने विशिष्ट अतिथियों, एडवोकेट जकावत सुल्तान, एडवोकेट अकमल अजहर (अलीगढ़ जिला न्यायालय के वकील) और श्री सैयद फैयाज अली, श्रम और रोजगार कानून सलाहकार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का परिचय कराया।


अधिवक्ता जकावत सुल्तान और अधिवक्ता अकमल अजहर ने कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न को संबोधित करने के लिए उपलब्ध कानूनी ढांचे, उदाहरणों और व्यवस्था के सम्बन्ध में अंतर्दृष्टि साझा की और अधिकारों और कानूनी उपाय को समझने, रिपोर्टिंग के लिए अनुकूल सहायक वातावरण को बढ़ावा देने और ऐसे मुद्दों को संबोधित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। .


श्री सैयद फैयाज अली ने इस उद्देश्य के लिए कानूनी ढांचे के व्यावहारिक पहलू में अंतर्दृष्टि प्रदान की, और कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने और इससे निपटने के लिए संगठनात्मक नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सक्रिय उपायों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उद्योग क्षेत्र में प्रचलित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।


कार्यक्रम के आयोजन में आयशा तनवीर, शालू कुमारी, सानिया यूसुफ सिद्दीकी, कायनात नौशीन और नशराह सहित एमएचआरएम छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


जुक्रा ने कार्यशाला का संचालन किया, जबकि आफी अहमद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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