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JNMC के चिकित्सक को कैंसर अनुसंधान के लिए ICMR से 2.25 करोड़ रुपये का अनुदान मिला

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अलीगढ मीडिया न्यूज़, अलीगढ़, 11 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद अकरम को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा

मनुष्य की आंत में पाये जाने वाले सहभागी बैक्टिरिया का कैंसर से संबंध और आंत के कैंसर के इलाज में उनकी भूमिका का अध्ययन करने के लिये 2.25 करोड़ रूपये का अनुदान प्रदान किया गया है।
प्रोफेसर मोहममद अकरम ने बताया कि आंत में आये जाने वाले सहभागी बैक्टिरिया सेहत के लिए बहुत आवश्यक हैं और यह हामें बहुत सी बीमारियों से भी बचाते हैं। लेकिन वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवन शैली से यह सहभागी बैक्टिरिया हमारी आंतों में कम हो रहे हैं। प्रोफेसर अकरम ने कहा कि परिणाम स्वरूप उनके स्थान पर रोग पैदा करने वाले बैक्टिरिया हमारी आंतों में कम हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसको डिस्विओसिस कहते हैं। आंत डिसब्योसिस विभिन्न बिमारियों विशेषकर कैंसर रोग के विकास और प्रगति में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में हो रहा है।
डा अकरम अपने अध्ययन में जिस डिस्बिओसिसि का अध्ययन करेंगे कि इसका आंत के कैंसर से क्या संबंध में और क्या हम लाभ दायक सहभागी बैक्टिरिया को आंत में बढ़ाकर आंत के कैंसर को कम कर सकते हैं तथा रेडीयोथेरेपी कीमियोथेरेपी से होने वाले साइडइफेक्ट को कम कर सकते हैं।
प्रो. अकरम ने नवीन चिकित्सीय रणनीतियों को विकसित करने के लिए इस संबंध को समझने के महत्व पर जोर दिया जो रोगी के परिणामों को बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रो. सलीम जावेद (जैव रसायन विभाग), प्रो. अफजाल अनीस (सर्जरी विभाग), प्रो. फातिमा खान (माइक्रोबायोलॉजी विभाग), डॉ. रूकैया अफरोज़ (पैथोलॉजी विभाग) और डॉ. हिफज़ुर आर. सिद्दीकी (जूलॉजी विभाग) सहित विविध पृष्ठभूमि के सह-शोधकर्ताओं के सहयोग से परियोजना की अंतःविषय प्रकृति को रेखांकित किया गया है। उनकी सामूहिक विशेषज्ञता आंत डिस्बिओसिस, कैंसर की प्रगति, आणविक तंत्र, नैदानिक हस्तक्षेप, सूक्ष्म जीव विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान और कैंसर जीव विज्ञान में बहुआयामी अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।
एएमयू कुलपति प्रो. नईमा खातून ने प्रो. अकरम और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की और कैंसर के प्रबंधन में परियोजना की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने अन्य विभागों के शिक्षकों को इसी तरह की अनुसंधान पहल और विभिन्न सरकारी एजेंसियों से ऐसी परियोजनाएं प्राप्त करने का प्रयास करने का आग्रह किया।
एएमयू रजिस्ट्रार, श्री मोहम्मद इमरान (आईपीएस) ने प्रोफेसर अकरम और उनकी टीम को महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पाने और विश्वविद्यालय में अंतःविषय अनुसंधान शुरू करने के लिए बधाई दी। उन्होंने आंतों के कैंसर में सहयोगात्मक बैक्टिरिया के महत्व को समझने पर भी पर जोर भी दिया।
मेडिसिन संकाय की डीन और जेएन मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल और सीएमएस, प्रोफेसर वीणा माहेश्वरी ने कैंसर अनुसंधान के ़क्षेत्र में उभरते युवा शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के बीच क्षमता और विशेषज्ञता के निर्माण में योगदान पर ज़ोर दिया।
प्रोफेसर अकरम ने बताया कि हाल ही में जेएन मेंडिकल कालिज में पूरे भारत से 250 से अधिक विशेषज्ञों के साथ माइक्रोबायोम-कैंसर कनेक्शन की खोज पर एक तीन दिवसीय सम्मेलन और कार्यशाला आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से सिर और गर्दन और पेल्विक कैंसर के रोगियों में प्रोबायोटिक्स अनुपूरण पर केंद्रित एक अन्य आईसीएमआर परियोजना का भी नेतृत्व कर रहे हैं और वह माइक्रोबायोम-कैंसर कनेक्शन पर एक किताब लिख रहे हैं, जो इस साल के अंत तक प्रकाशित हो जाएगी।



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नेल आर्ट में व्यावहारिक प्रशिक्षण
अलीगढ़, 11 मईः  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज के कौशल विकास और कैरियर नियोजन केंद्र द्वारा नेल आर्ट में व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें ब्यूटी कल्चर की 45 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया।
अपने उद्घाटन भाषण में, केंद्र की कार्यवाहक निदेशक प्रो. इमराना नसीम ने कहा कि नेल आर्ट नाखूनों को रंगने, सजाने, बढ़ाने और संवारने का एक रचनात्मक तरीका है। उन्होंने प्रतिभागियों से नवोन्वेषी दृष्टिकोण के साथ कला सीखने और स्व-अर्जन और आत्मनिर्भरता के लिए अपनी प्रतिभा को निखारने का आग्रह किया।
आईके अकादमी, अलीगढ़ के  दीपांशु धवन,  वंशिका वाष्र्णेय,  अदिति सैनी और  तैय्यबा ने छात्राओं को प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने निर्दिष्ट उत्पादों, उपकरणों और ब्रशों की सहायता से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों ने नए रुझानों और अद्वितीय अनुकूलन के बाद नेल एक्सटेंशन सहित विभिन्न प्रकार की नेल आर्ट सीखी।
सौंदर्य पाठ्यक्रमों की प्रशिक्षक वर्षा शर्मा,  मोमिना अतहर,  यासमीन तलत,  लुबना ग्यास ने प्रशिक्षण आयोजित करने में संसाधन व्यक्तियों की मदद की।
कार्यक्रम का संचालन स्टूडेंट काउंसलर डॉ. समरीन हसन खान ने किया।
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एएमयू के प्रोफेसर द्वारा एम्स, नई दिल्ली में एयरवे प्रशिक्षण आयोजित
अलीगढ़, 11 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जे.एन. मेडिकल कॉलेज के एनेस्थिसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग के प्रोफेसर एस. मोइद अहमद ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में आयोजित कैडवेरिक कार्यशाला के दौरान परक्यूटेनियस ट्रेकियोस्टोमी (पीसीटी) और सर्जिकल एयरवे की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने रिकॉर्ड किए गए वीडियो के माध्यम से पीसीटी पर अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया।
स्नातकोत्तर छात्रों के लिए आयोजित व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र में सर्जिकल वायुमार्ग की विभिन्न तकनीकों को शामिल किया गया, जो समय बचाने के लिए जीवन रक्षक बचाव प्रक्रियाएं हैं ताकि कम से कम ऑक्सीजन को रोगी के फेफड़ों में पहुंचाया जा सके जब तक कि एक निश्चित  वायुमार्ग द्वारा स्वरयंत्र को पारित न किया जा सके।
डॉ. अहमद ने इस बात पर जोर दिया कि सभी चिकित्सा पेशेवरों और यहां तक कि आम आदमी को भी जीवन रक्षक बचाव तकनीक सीखनी चाहिए और आपातकालीन स्थितियों से निपटने और मरीजों की जान बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए।



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अल्लामा इक़बाल बोर्डिंग हाउस के नये प्रभारी नियुक्त
अलीगढ़, 11 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सैय्यद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्नातकोत्तर शिक्षक, मोहम्मद अय्यूब को अल्लामा इकबाल बोर्डिंग हाउस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 19 जनवरी 2025 तक होगा।
मोहम्मद अय्यूब पिछले 30 वर्षों से सीनियर सेंकंड्री स्कूल में अधिक समय से शिक्षण कार्य में लगे हुए हैं और उन्होंने युवा स्कूली छात्रों के साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने के साथ ही विभिन्न प्रशासनिक क्षमताओं में विश्वविद्यालय की सेवा की है। अपने छात्रकाल के दौरान वह 1990 में एएमयू छात्र संघ सचिव के भी रहे।
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प्रो असलम फिजियोलोजी विभाग के नये अध्यक्ष नियुक्त
अलीगढ़, 11 मईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जे.एन. मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद असलम को संबंधित विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल दिसम्बर 2026 तक होगा।
प्रोफेसर असलम गत 28 वर्षों से अधिक समय से शिक्षण और अनुसंधान में लगे हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति की पत्रिकाओं में 15 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और 10 से अधिक सम्मेलनों और सेमिनारों में पत्र प्रस्तुत किए हैं। वह ‘इलस्ट्रेटेड फिजियोलॉजी एंड एप्लाइड आस्पेक्ट्स‘ पर एक पाठ्य पुस्तक पर भी काम कर रहे हैं।
वह एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया (एएसएसओपीआई), इंडियन एकेडमी ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर न्यूरोकैमिस्ट्री ( आईएसएन) आदि सहित विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के सदस्य रहे हैं।
प्रोफेसर असलम को तंत्रिका विज्ञान, रुधिर विज्ञान, तंत्रिका मांसपेशी शरीर क्रिया विज्ञान और मस्तिष्क के उच्च कार्यों में शिक्षण और अनुसंधान में विशेष रुचि है।

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