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#Aligarh: एक्सटॉर्शन रैकेट के खिलाफ सबूत पेश करने से रोक रहे हैं कुछ काले कोट वाले, प्रेसवार्ता में गंभीर आरोप

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अलीगढ मीडिया डिजिटल, न्यूज़ नेटवर्क, अलीगढ | रविवार को महिलाओं को गंभीर अपराधों से बचने के लिए बनाए गए कठोर कानून के दुरुपयोग के संबंध में प्रेस वार्ता आयोजित की गयी। उक्त को सम्बोधित करते हुए स्वराज्य समिति के सौरभ भरद्वाज ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर के विष्णु तिवारी पर सितंबर सन 2000 में बलात्कार और दलित उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाने वाली महिला पर भरोसा करते हुए 2001 में ट्रायल कोर्ट ने विष्णु को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई। सौम्य और प्रतिभाशाली विष्णु को 20 वर्ष तक कठोर कारावास में रखे जाने के बाद विष्णु की अपील पर मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायाधीश कौशल जयेंद्र ठाकर और गौतम चौधरी की खंडपीठ ने उन्हें निर्दोष पाया। निर्दोष विष्णु ने जेल में रहते हुए अपने पिता, माता और दो भाइयों को खो दिया, जमीन और संपत्ति बरबाद हो गयी। अपने परिवार के सदस्यों के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। विष्णु का पुनर्वास एक चुनौती है और नुकसान की भरपाई असंभव है। विष्णु तिवारी का मामला बलात्कार के आरोप को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने की बानगी भर है। 

       उन्होंने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश गौतम चौधरी ने यौन शोषण का आरोप लगा रही महिला की शीघ्र सुनवाई हेतु याचिका पर सुनवाई करते हुए “निक्की देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य” मामले में आरोप को ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल के कारण ऐसे 50 मुक़दमे सीबीआई को सोंपे। थाना हरिपर्वत आगरा पुलिस ने भी बलात्कार का झूठा आरोप लगा रही महिला और सौदेबाज वकीलों को गिरफ्तार किया है।

       अलीगढ़ में मा० न्यायालय में दुष्कर्म के आरोप पर सुनवाई के दौरान मामले का फर्जी होना और इसमें एक वकील की भूमिका होना फर्जी पीड़िता ने स्वीकार किया थाना सिविल लाइन्स, अलीगढ में गेंगस्टर एक्ट का मामला भी दर्ज हुआ।

        बलात्कार का आरोप हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्दोष लोगों को फंसाकर उनसे धन ऐंठने, उन्हें सबक सिखाने और फर्जी आपराधिक इतिहास बनाकर बदनाम और बेइज्जत करने के लिए कानूनी राय लेकर बलात्कार के झूठे आरोप बहुत व्यापक स्तर पर लगाए जा रहे हैं।



       जनपद अलीगढ़ के अतरौली स्थित सामाजिक संस्था स्वराज समिति, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु बने कठोर कानूनों के पुरुषों के विरुद्ध दुरुपयोग, प्रेमी जोड़ों के उत्पीड़न, ऑनर किलिंग, रैगिंग, भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करते हुए व्हिसलब्लोअर्स (भण्डाफोड़कर्ताओं) के साथ सुबूत जुटाने, न्याय के लिए सुबूतों के प्रयोग, सूचना अधिकार कानून का प्रयोग, सहित जनहित और न्यायहित के अनेक विषयों पर काम करती है। संस्था द्वारा नगर पालिका परिषद अतरौली में दुकान आवंटन घोटाले का खुलासा किया गया था और एक डिग्री कॉलेज मालिक के भाई द्वारा अपनी ही अविवाहित छात्रा को गर्भवती कर दिए जाने के बाद उसकी ऑनर किलिंग की संभावना होने पर पीड़िता को संरक्षण और सहायता दी थी। संस्था द्वारा की गई कानूनी कार्यवाही से अतरौली की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा दुकानों के फर्जी आवंटन घोटाले में कानूनी कार्यवाही का सामना कर रही है और पीड़िता भी न्याय हेतु संघर्षरत है। 


इन दोनों मामलों में कानूनी कार्रवाई करने से रोकने और रकम वसूलने के लिए एक्सटॉर्शन रैकेट के रूप में काम करते हुए ब्लैकमेलर्स ने कानूनी राय लेकर स्वराज समिति के सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज आदि के विरुद्ध रास्ता रोकने, पीछा करने, धमकी देने और गाली देने का मामला थाना अतरौली पर दर्ज कराया। इसके बाद एक्सटॉर्शन रैकेट ने वकील गजराज कौशिक के जरिए सौरभ भारद्वाज को इस मुकदमे की जानकारी दी और एक्सटॉर्शन रैकेट की फर्जी पीड़िता, उसके भाई और मां ने अतरौली आकर सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज से मिलकर मामले को बलात्कार के मामले का रूप देने की धमकी देते हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और कॉलेज मालिक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई रोकने, सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज से दो-दो लाख रुपए नगद और आरोपी के रूप में पुलिस जाँच का सामना कर रही फर्जी पीडिता के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही रोकने की भी मांग रखी। मांगे पूरी न होने पर कानूनी राय लेकर काम कर रही फर्जी पीड़िता ने अचानक बलात्कार का झूठा बयान देना शुरू कर दिया। केवल बयान के आधार पर बलात्कार का मामला चलाकर दवाब बढ़ाते हुए एक्सटॉर्शन रैकेट की मांगे पूरी करने के लिए आतंकित और परेशान किया जाने लगा। एक्सटॉर्शन रैकेट के लोग बड़ी सावधानी के साथ रिकॉर्ड किए जाने की संभावना समाप्त करके मांगे रखते थे। किंतु, फर्जी पीड़िता, उसके पारिवारिकजनों, पुलिस और स्वयं के लिए वसूली करते वकील विद्यासागर कौशिक को सफलतापूर्वक रिकॉर्ड किया गया इसके अतिरिक्त वसूली के अन्य प्रयास भी रिकॉर्ड किए गए, रेखा शर्मा पूर्व अध्यक्ष, नगर पालिका अतरौली के पति सुबोध कुमार उर्फ भूरा पंडित एवं अतरौली नगर के डिग्री कॉलेज संचालक द्वारा इस फर्जी मामले को प्रायोजित किया जाना और सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज के विरुद्ध यह मुकदमा ख़त्म कराने के बदले स्वराज समिति से सहायता प्राप्त पीडिता का मुकदमा ख़त्म कराने का अतरौली के डिग्री कॉलेज मालिक का प्रस्ताव भी रिकॉर्ड हुआ। यह लोग सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज को फर्जी मुक़दमे में सजा का खौफ दिखाते हुए दबाव बनाकर स्वराज समिति द्वारा की जा रही कानूनी कार्यवाही को समाप्त कराने और वसूली के लिए प्रयास कर रहे थे। एक्सटॉर्शन रैकेट के लिए काम कर रहे वकील रामानुज कौशिक भी झूठे मुकदमे का झूठा होना जानते हुए न केवल इस पर बल दे रहे थे बल्कि, एक्सटॉर्शन रैकेट की करतूत रिकॉर्ड किए जाने की संभावना समाप्त करने, मामले की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान गवाहों को डरा धमकाकर और बदतमीजी करते हुए एक्सटॉर्शन रैकेट के विरुद्ध साक्ष्य देने से रोक रहे थे। सुनवाई के दौरान एक्सटॉर्शन रैकेट के लोग सौरभ भारद्वाज और अंशुल भारद्वाज को कानूनी कार्रवाई करने से रोकने के लिए मारपीट जान से मारने की धमकी और अन्य मामलों में फंसा देने की धमकी देते हुए एक्सटॉर्शन रैकेट के खिलाफ सबूत पेश करने से रोक रहे हैं। दबंग एक्सटॉर्शन रैकेट के लोग न्यायालय परिसर में मारपीट आदि संगीन मामलों में लिप्त हैं, न्यायालय परिसर में एक दरोगा से मारपीट और लूट का मामला भी चल रहा है।

 इस फर्जी मामले का हवाला देकर सौरभ भारद्वाज के विरुद्ध लोगों को भड़काने का कार्य करते हुए ग्राम लोहगढ़ अतरौली का पेशेवर अपराधी केदार सिंह उर्फ प्रताप सिंह भी इस गलत मुकदमे का सहारा लेकर झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर लोगों को लोगों को उकसा रहा है। कानूनों के आपराधिक दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए , प्रक्रिया की समीक्षा की आवश्यकता जताई गयी| प्रेस वार्ता में सर्व श्री सौरभ भारद्वाज, अंशुल भारद्वाज, गगन, रिंकू और नरेश चौधरी आदि उपस्थित रहे।


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