​सूचना आयोग की सख्ती: अलीगढ़ DIOS और BSA दोनों के खिलाफ शिकंजा,

Aligarh Media Desk

_DIOS से 9 जून को पुनः जवाब-तलब, 4 मई को BSA तलब_

अलीगढ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़| उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने अलीगढ़ के शिक्षा विभाग में व्याप्त सूचना छिपाने की प्रवृत्ति और अधिकारियों की उदासीनता पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोचिंग संस्थानों और बेसमेंट लाइब्रेरी की वैधता से जुड़े एक गंभीर मामले में आज (13 अप्रैल 2026) जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अलीगढ़ के सुनवाई से नदारद रहने पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है।


​राज्य सूचना आयुक्त श्रीमती शकुंतला गौतम की कोर्ट के समक्ष कोचिंग संस्थानों के अवैध संचालन और सुरक्षा मानकों से जुड़ी एक शिकायत पर सुनवाई निर्धारित थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि न तो डीआईओएस अलीगढ़ स्वयं उपस्थित हुए और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि पहुंचा। अधिकारियों की इस कार्यशैली को "आदेशों की अवहेलना" मानते हुए आयोग ने मामले को अगली सुनवाई 09 जून 2026 के लिए टाल दिया है और संबंधित अधिकारी को स्पष्टीकरण के साथ पुनः तलब किया है।


*​बीएसए कार्यालय का मामला: भ्रष्टाचार और मान्यता पर घेराबंदी*

​डीआईओएस के साथ-साथ अलीगढ़ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पर भी गाज गिरी है। आरटीआई कार्यकर्ता हिमांक अरोरा द्वारा स्कूलों की मान्यता, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कोटा और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मांगी गई जानकारी न देने पर आयोग ने बीएसए को भी तलब किया है।


​इस मामले में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. ​उदासीनता पर अर्थदंड की मांग: शिकायतकर्ता ने सूचना देने में जानबूझकर देरी करने के आरोप में अधिकारियों पर भारी अर्थदंड लगाने की मांग की है।

2. ​जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव: 2022 से अब तक स्कूलों के खिलाफ प्राप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों और उन पर हुई जांच रिपोर्ट को विभाग द्वारा छिपाने का आरोप है।


*​शिकायतकर्ता का बयान*

​आवेदक हिमांक अरोरा ने कहा, "शिक्षा विभाग के आला अधिकारी न तो जनता के प्रति जवाबदेह हैं और न ही संवैधानिक संस्था (सूचना आयोग) के प्रति। कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा और स्कूलों की मान्यता जैसे गंभीर विषयों पर चुप्पी विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। 9 जून की सुनवाई में हम दोषी अधिकारियों पर अधिकतम जुर्माने की मांग करेंगे।"


​प्रमुख मांगें जिन पर देना होगा जवाब:

1. ​जनपद में संचालित कोचिंग संस्थानों और उनकी बेसमेंट लाइब्रेरी की वैधता।

2. ​निजी विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण के प्रमाणित अभिलेख।

3. ​पिछले 3 वर्षों में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान का ब्यौरा।

4. ​भ्रष्टाचार के कारण जिन स्कूलों की मान्यता रद्द हुई, उनकी विस्तृत सूची।