प्रशासन के दावों की खुली पोल: डीएम के आदेश हवा-हवाई, रात के अंधेरे में गरज रहे खनन माफियाओं के ट्रक
अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़। जनपद में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत पूरी तरह शून्य साबित हो रही है। अलीगढ़ मीडिया डिजिटल की ख़बर और जनता की दर्जनों शिकायतों पर जिलाधिकारी अविनाश कुमार का 'सख्त रुख' और 'संयुक्त प्रवर्तन अभियान' का निर्देश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। मिट्टी खनन माफियाओं ने जिलाधिकारी के आदेशों को ठेंगे पर रखकर शासन-प्रशासन की साख को खुली चुनौती दे डाली है।
मामला क्वार्सी थाना क्षेत्र के अंतर्गत चिलकोरा और गोकुलेशपुरम कॉलोनी का है, जहां बुधवार रात (27 मई, 2026) को प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत देखने को मिला। रिहायशी कॉलोनियों के बीच से ये ओवरलोड डम्फर इतनी अंधाधुंध और अनियंत्रित गति से फर्राटा भर रहे हैं कि स्थानीय निवासियों की सांसें अटकी हुई हैं। रात के समय सड़कों पर सन्नाटा होते ही इन भारी वाहनों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। घनी आबादी वाले इन रास्तों पर हर वक्त किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का डर बना रहता है, लेकिन जनता की जान की परवाह न तो माफियाओं को है और न ही इलाके की पुलिस को। वहीं हरदुआगंज इलाके के जारोठी, कलाई और उखलाना गांव के खेतो में मिट्टी माफिया दीनदहाड़े जेसीबी मशीनों के खुलेआम खनन करते वीडियो देखे जा सकते हैँ| लेकिन लेकिन उपजाऊ ज़मीन से मिट्टी खनन करने की नियम विरुद्ध परमिशन देने वाले खान अधिकारी को यह दिखाई नहीं दे रहा हैँ| अतरौली थाना इलाके के अहमदपुरा गांव में वीयर फैक्ट्री के सामने खेतोँ में खुलेआम JCB मशीनों से खुदाई करके डम्पर भरे जा रहे हैँ|
गश्ती पुलिस की नाक के नीचे चल रहा अवैध खेल
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल इलाके की कानून व्यवस्था पर खड़ा होता है। रात के समय जिन पुलिस अधिकारियों और गश्ती दलों पर क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा होता है, उन्हीं की नाक के नीचे यह अवैध खनन और डम्फरों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। पुलिस की पीआरवी और गश्ती गाड़ियां सड़कों पर होने के बावजूद इन खनन माफियाओं को न रोका जाना, सीधे तौर पर खाकी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। क्या यह मान लिया जाए कि गश्त पर रहने वाले अधिकारियों की मर्जी से ही रात का यह काला कारोबार फल-फूल रहा है?
जिम्मेदार सोए, खनन अधिकारी का CUG नंबर हुआ 'ऑफ'
इस पूरे खेल में खनन विभाग की भूमिका भी पूरी तरह संदेहास्पद है। एक तरफ जहां विभाग 124 वाहनों की जांच और साढ़े चार लाख के जुर्माने का ढोल पीट रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है। हद तो तब हो गई जब इस अवैध संचालन के खिलाफ जानकारी लेने और शिकायत दर्ज कराने के लिए जिला खनन अधिकारी के सरकारी सीयूजी (CUG) नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकारी महोदय का फोन 'स्विच ऑफ' मिला। हरदुआगंज, अतरौली, क्वारसी, और महुआँखेड़ा थाना पुलिस की तो मिट्टी खनन माफियाओ से बड़ी कर्री जुगलबंदी हैँ| मिट्टी खनन माफिया थानेदारों को गर्म गोस्त, दारू-मुर्गा और हर सुविधा मुहैया करते हैँ|
जनता का आक्रोश: मिलीभगत के खिलाफ आर-पार की मांग
अवैध खनन के इस खुले खेल, पुलिस की संदिग्ध चुप्पी और ऐन वक्त पर खनन अधिकारी का फोन बंद होना, यह साफ इशारा करता है कि पर्दाफाश होने के डर से जिम्मेदार भाग रहे हैं। जब रक्षक ही आंखें मूंदकर बैठ जाएंगे, तो जनता न्याय की गुहार किससे लगाएगी? जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों का मखौल उड़ाने वाले इन पुलिसकर्मियों, लापरवाह अधिकारियों और बेलगाम खनन माफियाओं के खिलाफ अब स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और आर-पार की कार्रवाई की मांग उठ रही है।

