अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़ |तीज महोत्सव हर्षोल्लास एवं पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न, डॉ. लक्ष्मी बनीं “तीज क्वीन”डॉ. लक्ष्मी के सटीक उत्तर, उत्कृष्ट व्यक्तित्व, पारंपरिक साज-सज्जा तथा भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहन ज्ञान से सभी उपस्थित महिलाएँ एवं निर्णायक मंडल अत्यंत प्रभावित हुए।
इन्हीं विशेष गुणों के आधार पर डॉ. लक्ष्मी को आज के तीज महोत्सव की “तीज क्वीन” चुना गया। जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सभी महिलाओं ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं
कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्मी से तीज एवं सोलह शृंगार से संबंधित कई प्रश्न पूछे गए। उन्होंने अत्यंत आत्मविश्वास और प्रभावशाली ढंग से बताया कि सोलह शृंगार केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सौभाग्य, प्रेम, समर्पण और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। उन्होंने समझाया कि तीज के अवसर पर विवाहित महिलाएँ सोलह शृंगार करके भगवान शिव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने, अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह परंपरा भारतीय संस्कृति, नारी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को भी सशक्त बनाती है।

