अलीगढ़ पुलिस ने नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत लोगों को किया जागरूक

प्रवीन कुमार, ब्यूरो चीफ अलीगढ़

 


प्रतिभागियों को साइबर योद्धा बनाने का उद्देश्य 

एसएसपी के निर्देशन में साइबर सेल ने दी साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़। अलीगढ़ पुलिस की ओर से नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है। 24 अक्टूबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत एसएसपी अलीगढ़ के निर्देशन में साइबर सेल के माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।


कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सचेत करना और ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपायों की जानकारी देना है। इसके माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने तथा इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया।


पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और गोपनीय पासवर्ड साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और ऑनलाइन लेनदेन करते समय विशेष सावधानी बरतें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

अलीगढ़ पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की।


साइबर अपराधी लोगों के डर और अज्ञानता का उठाते हैं फायदा: एसएसपी

बच्चे के एक्सीडेंट का झांसा देकर 10 लाख रुपये की ठगी का उदाहरण देकर किया जागरूक


अलीगढ़। नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत आयोजित वेबिनार एवं कार्यशाला में एसएसपी अलीगढ़ ने लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करते हुए सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों के डर, भावनाओं और जानकारी के अभाव का फायदा उठाकर ठगी करते हैं। ऐसे अपराधों से बचने के लिए जागरूकता और समझदारी बेहद जरूरी है।


एसएसपी ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति बेंगलुरु में नौकरी करता था। उसके पास फोन आया कि उसके बच्चे का एक्सीडेंट हो गया है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। फोन करने वाले ने इलाज के लिए तत्काल 10 लाख रुपये की मांग करते हुए यूपीआई के माध्यम से पैसे भेजने को कहा। बच्चे की सुरक्षा को लेकर घबराए व्यक्ति ने बिना उससे संपर्क किए ही रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में जब उसने अपने बच्चे को फोन किया तो पता चला कि वह पूरी तरह ठीक है और उसके साथ कोई हादसा नहीं हुआ था। इस तरह व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो गया।


एसएसपी ने कहा कि साइबर अपराधी इसी तरह लोगों को घबराहट में डालकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं। फोन पर मिलने वाली हर सूचना पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने या किसी आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें।


उन्होंने कहा कि लोग बाजार में सामान खरीदते समय काफी जांच-पड़ताल करते हैं, लेकिन फोन आने पर अनजान व्यक्ति पर भी आसानी से विश्वास कर लेते हैं। साइबर अपराधी पैसे दोगुने करने और कम समय में बड़ा मुनाफा दिलाने जैसे लालच देकर भी लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे प्रलोभनों से बचना चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना सत्यापन के पैसे नहीं भेजने चाहिए।

एसएसपी ने कार्यशाला में जागरूकता प्रमाणपत्र दिए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्र को सुरक्षित रखें और यहां मिली जानकारी को अपने परिवार, पड़ोसियों तथा मोहल्ले के अन्य लोगों तक पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हो सकें।