हाथों में होनी थीं किताबें, मजबूरी में रिक्शे पर ढो रहें हैं कबाड़

Aligarh Media Desk

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, हरदुआगंज| देखिए ये तस्वीर रामघाट रोड की है। उम्र पढ़ने-लिखने की,कंधों पर किताबों का बोझ होना चाहिए था। लेकिन मजबूरी ने इस छात्र के हाथों में कलम की जगह कबाड़ ढोने रिक्शा थमा दिया एक रिक्शा कबाड़ से भरे रिक्शा खीच रहा है दूसरा पीछे से धक्का लगा रहा है 

ये कभी सपने मेभी नहीं सोची  होगी ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे!

रिक्शे पर कबाड़ लादकर ये दोनो बच्चे रोज अपनी गुजर-बसर कर रहा है। घर की माली हालत ऐसी कि स्कूल छूट गया और बाल मजदूरी नसीब बन गई। दिनभर कबाड़ बीनकर जो पैसे मिलते हैं, उसी से घर का चूल्हा जलता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में ऐसे कई बच्चे हैं जो शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। सरकार की तमाम योजनाओं के बाद भी इन तक न किताबें पहुंचीं, न छात्रवृत्ति। जिला प्रशासन का दावा है कि बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन रामघाट कीरोड की ये तस्वीर उन दावों की पोल खोल रही है।" 


(✍️_हरदुआगंज से लाखन सिंह)