हरदुआगंज: फर्जी बेनामा मामले में मुख्य आरोपी सचिन गौड़ की गिरफ्तारी अबतक नहीं, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल!

Chanchal Varma



"फर्जी बैनामा प्रकरण मे स्थानीय बकील की भूमिका संदिग्ध, इलाके मे बड़ा भू-माफिया है संदिग्ध बकील, इसी बकील ने आरोपी सचिन गौड़ से अपने परिवारजनों के नाम कराई है बेशकीमती ज़मीन का एक हिस्सा"

अलीगढ़ मीडिया डिजिटल, अलीगढ़। तहसील कोल क्षेत्र के उखलाना ग्राम पंचायत स्थित बेशकीमती भूमि के कथित फर्जी बेनामा मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता रंजन राना ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मामले में शीघ्र कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।


शिकायत के मुताबिक, परगना मौरथल स्थित गाटा संख्या 1490 की भूमि रामघाट रोड पर साधु आश्रम के पास स्थित है। आरोप है कि इस जमीन के वास्तविक मालिक टीका पुत्र रूपा, निवासी सफेदपुरा, की कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद आरोपित सचिन गॉड पुत्र रघुराज सिंह, निवासी चाऊपुर हौज, तहसील अतरौली, हाल निवासी अतरौली कस्बा, के नाम 4 सितंबर 2025 को तहसील कोल से कथित तौर पर बेनामा कराया गया।

ये है फर्जीबाड़े के मुख्य गवाह:

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैनामा कराने के लिए मृतक व्यक्ति के नाम और फोटो का इस्तेमाल किया गया। दस्तावेज में प्रवीण कुमार अग्रवाल पुत्र मुरारीलाल, निवासी कृष्णा विहार रेलवे कॉलोनी, क्वार्सी तथा सचिन कुमार पुत्र हीरालाल, निवासी नगला मशानी, तहसील कोल को गवाह बनाए जाने की बात कही गई है।

फर्जीबाड़े मे तहसील कोल के अधिवक्ता अवधेश सिंह चौहान की भूमिका भी संदिग्ध 

 हरदुआगंज मे दर्ज मुक़दमा संख्या 382/26 अंतर्गत BNS 318(4), 319(2), 61(2) मे उल्लेखित बिक्रयपत्र (बैनामा) के अनुसार दस्तावेज सौरभ सिंह द्वारा टाइप किया गया था, जबकि तहसील कोल मे कार्यरत अधिवक्ता अवधेश सिंह चौहान ने इसे प्रमाणित किया था। मामले में मृतक की फोटो को वास्तविक व्यक्ति के रूप में प्रमाणित किए जाने को लेकर अधिवक्ता की भूमिका पर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। क्योंकि बिना तथ्यों को जांचे किसी फर्जी दस्तावेज प्रमाणित करना अधिवक्ता अधिनियम का दुरूपयोग और अवहेलाना है |हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।

..आखिर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं?

शिकायतकर्ता रंजन राना की एफआईआर के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। बताया गया है कि साधु आश्रम चौकी इंचार्ज को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन मुकदमा दर्ज होने के काफी समय बाद भी मुख्य आरोपी सचिन गॉड की गिरफ्तारी नहीं होने से शिकायतकर्ता ने पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।

... टीका के फर्जी वारिसों को मीडिया मे सामने लाने लाने मे किसकी भूमिका?

इस बीच, मामले की चर्चा एक समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद कुछ लोगों द्वारा मृतक टीका की लावारिश भूमि के वारिस होने का दावा किए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि सामने आए कथित वारिस भी वास्तविक नहीं हैं। इस संबंध में अलीगढ मीडिया डिजिटल को भी कुछ दस्तावेज मिले है जिसमे साफ है कि अतरौली तहसील के गांव मौसमपुर का रहने वाले जिस रमेश नाम के व्यक्ति ने खुद को टीका का बेटा बताया है वह भी इन्ही फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग का व्यक्ति है| इस प्रकरण की स्क्रिप्ट लिख रहे एक स्थानीय बकील की नजर इस बेशकीमती ज़मीन पर है|सूत्रों की माने तो स्थानीय बकील ने ही इस पूरे फर्जीवाड़े की पटकथा लिखी है, लेकिन पुलिस की जाँच अभी जानबूझकर इस ओर नहीं है, हालांकि दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब पूरे मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ कथित बै नामा तैयार कराने, गवाहों की भूमिका, दस्तावेजों के सत्यापन तथा जमीन पर दावा करने वाले लोगों की वास्तविकता की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।