हरदुआगंज सीएचसी में मरीजों को दी चिकित्सकीय सलाह, आलोचकों ने अभियान को फोटो सेशन तक सीमित करने का लगाया आरोप
अलीगढ मीडिया डिजिटल, हरदुआगंज । मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से कंपोजिट विद्यालय कोंडरा की कक्षा आठ की छात्रा गुंजन को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरदुआगंज में एक दिन के लिए डॉक्टर बनाया गया। इस पहल के माध्यम से छात्रा को चिकित्सा क्षेत्र की कार्यप्रणाली को करीब से समझने और भविष्य में अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर अभियान के उद्देश्यों और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, विद्यालय के सहायक अध्यापक ताराचंद दिवाकर के मार्गदर्शन में मिशन शक्ति के तहत छात्रा गुंजन को यह अवसर प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्रा ने मरीजों को चिकित्सकीय सलाह दी और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की पहल से बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है, उनकी प्रतिभा को पहचान मिलती है और वे शिक्षा एवं करियर के प्रति प्रोत्साहित होती हैं।
वहीं, कार्यक्रम की आलोचना करने वालों का आरोप है कि मिशन शक्ति जैसे महत्वपूर्ण अभियान को जागरूकता और महिला सशक्तीकरण के ठोस प्रयासों के बजाय फोटो सेशन तक सीमित किया जा रहा है। उनका कहना है कि आठवीं कक्षा की छात्रा को एक दिन के लिए डॉक्टर बनाने से अभियान के वास्तविक उद्देश्यों की पूर्ति किस हद तक होगी, इस पर विचार किया जाना चाहिए। आलोचकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता बनाने के बजाय बालिकाओं की सुरक्षा, अधिकारों, स्वास्थ्य जागरूकता और करियर मार्गदर्शन पर भी गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।
प्रेरणा के साथ ठोस प्रयास भी जरूरी
मिशन शक्ति का उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं को जागरूक करना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना तथा उन्हें अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग बनाना है। छात्रा गुंजन को डॉक्टर की भूमिका का अनुभव देना उसके भविष्य के लिए प्रेरणादायी कदम हो सकता है, लेकिन अभियान की सफलता का आकलन केवल आयोजन और तस्वीरों से नहीं, बल्कि बालिकाओं को मिलने वाले वास्तविक लाभ से किया जाना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों के साथ नियमित जागरूकता, करियर परामर्श और महिला सुरक्षा से संबंधित गतिविधियां भी प्रभावी ढंग से संचालित किए जाने की जरूरत है।

